पेपर लीक मामलों की सुनवाई अब सीधे फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जाएगी. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इसका बड़ा ऐलान किया है. देशभर में चल रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन के बीच पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें सबसे कठोर सजा दी जाएगी. प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद यह सवाल उठ रहा था कि देश में कुल कितनी फास्ट ट्रैक अदालतें होंगी और वे किन-किन जगहों पर स्थापित की जाएंगी. इस संबंध में अब आधिकारिक जानकारी सामने आ गई है, जिसके तहत चार प्रमुख राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जहां मुख्य रूप से पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई की जाएगी.
🏛️ किन हाईकोर्ट्स के क्षेत्राधिकार में बनेंगी फास्ट-ट्रैक अदालतें?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद और नागपुर बेंच, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, कलकत्ता हाई कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) के अंतर्गत प्राथमिकता के आधार पर विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा गया है.
📜 पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत होगी सख्त कार्रवाई
आपको बता दें कि देश में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने और दोषियों को कड़ा दंड देने के लिए सरकार द्वारा ‘The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act 2024’ कानून बनाया गया था, जो बीते 21 जून 2024 से प्रभावी हो चुका है. इस सख्त कानून के तहत पेपर लीक और नकल जैसे मामलों में सजा के प्रावधानों को बेहद कठोर बनाया गया है. इसके दायरे में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), आईबीपीएस (IBPS), केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली तमाम परीक्षाएं आती हैं. चूंकि NTA द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाएं भी इसी कानून के दायरे में आती हैं, इसलिए इन परीक्षाओं में अनुचित साधनों (अनफेयर मीन्स) के इस्तेमाल से जुड़े सभी मामले स्वतः इसके अंतर्गत आ जाएंगे.
⏱️ फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने के बाद क्या होगा बदलाव?
विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन के बाद मुकदमों की सुनवाई बेहद तेजी (Sped-up Trial) से होगी. अदालतों में रोजाना सुनवाई की जाएगी, जिससे मामलों का निपटारा कम समय में होगा और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सकेगी. वर्तमान में हालिया नीट परीक्षा में हुए पेपर लीक मामलों को लेकर सबसे ज्यादा केस बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर और औरंगाबाद बेंच तथा कलकत्ता हाई कोर्ट के ज्यूरीडिक्शन में दर्ज किए गए हैं, जबकि दिल्ली हाई कोर्ट के क्षेत्राधिकार में मुख्य रूप से विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए लाठीचार्ज आदि से जुड़े मामले दर्ज हुए हैं. इस संबंध में केंद्र सरकार की तरफ से संबंधित राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों को संदेश भेजकर फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने और रोजाना सुनवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है.
📱 “युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट शेयर करते हुए प्रश्नपत्र लीक के मामलों में संलिप्त लोगों को शीघ्र और कठोरतम सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की बात कही थी. उन्होंने जोर देते हुए कहा था कि प्रश्नपत्र लीक से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अब त्वरित अदालतों में होगी, मुकदमों का निपटारा जल्द से जल्द किया जाएगा और दोषियों को बिना किसी अनावश्यक देरी के कानून के तहत कड़ी सजा दिलाई जाएगी.
यह खबर आपको कैसी लगी?


देश




























