बस्तर संभाग के जिलों में गत 23 से 26 सितंबर के दौरान हुई मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कहर से तबाह हुए लोगों के लिए राज्य शासन की ओर से राहत कार्यों में तेजी लाई गई है। बाढ़ की वजह से जहां कई इलाके टापू बन गए थे और खेतों से लेकर मकानों तक पानी भरने से भारी तबाही हुई थी, वहीं अब जिला प्रशासन ने प्रभावितों को आर्थिक संबल प्रदान करना शुरू कर दिया है। राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के तहत शासन की मंशा के अनुरूप पात्र बाढ़ पीड़ितों को सीधे उनके बैंक खातों में पारदर्शी तरीके से राहत राशि अंतरित की जा रही है।
🏠 मकान क्षति और बर्तन नुकसान के लिए करोड़ों का भुगतान, सर्वे का कार्य जारी
बस्तर जिला प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 तक आपदा से क्षतिग्रस्त हुए कुल 4,946 मकानों के लिए 24 करोड़ 81 लाख 66 हजार रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
मकान क्षति सहायता: इसमें पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए 1,823 मकानों के लिए 23 करोड़ 34 लाख रुपये तथा आंशिक रूप से क्षति वाले 3,123 मकानों के लिए 1 करोड़ 47 लाख 66 हजार रुपये की राशि शामिल है।
घरेलू सामग्री व अन्य सहायता: इसके अलावा आपदा में मृत 2 व्यक्तियों के परिजनों को 8-8 लाख (कुल 16 लाख) की अनुग्रह राशि, 5 पशुहानि के मामलों में 1.71 लाख रुपये, फसल नुकसान के लिए 69,360 रुपये और 3,237 प्रभावितों को बर्तन व घरेलू सामग्री के नुकसान की एवज में 80 लाख 92 हजार 500 रुपये की मदद पहुंचाई गई है।
प्रशासन के अनुसार, फसल क्षति का सर्वे अभी भी जारी है और कुछ तहसीलों में इसके बिल जमा हो रहे हैं। शेष बचे सभी प्रभावितों को भी जल्द ही मुआवजा राशि प्रदान कर दी जाएगी, और इस पूरी प्रक्रिया को एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इस त्वरित वित्तीय सहायता से संकट में फंसे ग्रामीण परिवारों और निचले इलाकों के लोगों को काफी राहत मिली है।⚡ एक सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा शेष सर्वे और मुआवजा वितरण का काम
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