कवर्धा जिले में पिछले कुछ दिनों से अपनी 23 सूत्रीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे किसानों और भारतीय किसान संघ का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ किसानों के प्रतिनिधिमंडल की एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें सरकार ने किसानों की चार प्रमुख मांगों पर मुहर लगा दी है। सरकार के इस सकारात्मक फैसले के बाद किसान संघ ने अपना चक्काजाम और आंदोलन स्थगित करने की घोषणा कर दी है, जिससे आम जनता और प्रशासन ने बड़ी राहत की सांस ली है।
💰 गन्ने की कीमत में भारी इजाफा, धान तौल और बिजली निजीकरण पर भी बनी सहमति
इस अहम बैठक में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई बड़े फैसले लिए गए:
गन्ने का भाव: गन्ने की खरीदी दर 329 रुपये से बढ़ाकर सीधे 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी गई है, जिससे गन्ना उत्पादक किसानों को प्रति क्विंटल 96 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
अन्य प्रमुख मांगें: कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये अनुदान देने, धान खरीदी केंद्रों में तौल की मात्रा 41.500 किलो से घटाकर 40.700 किलो करने, तथा बिजली के निजीकरण की योजना पर तुरंत रोक लगाने जैसे मुद्दों पर भी सहमति बन गई है।
किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा मुख्य मांगें माने जाने के बाद उन्होंने फिलहाल अपना चक्काजाम और आंदोलन स्थगित कर दिया है। हालांकि, जिला प्रशासन के स्तर पर लंबित अन्य मांगों को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की गई है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे आगे की रणनीति तैयार कर बाकी मांगों को पूरा कराने के लिए भी सरकार के संपर्क में बने रहेंगे। वहीं, भारतीय किसान संघ की स्थापना 4 मार्च 1979 को राजस्थान के कोटा में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, जो देश भर में किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है।🤝 आंदोलन स्थगित, लेकिन बाकी लंबित मांगों पर बनी रहेगी नजर
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