रायपुर: देश भर में चर्चित रहे महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) और सट्टेबाजी के इस विशालकाय नेटवर्क में मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मूल रूप से छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला सौरभ चंद्राकर और उसके साथी रवि उप्पल ने मिलकर इस ऑनलाइन सट्टेबाजी के काले कारोबार की नींव रखी थी और बाद में दुबई से बैठकर इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विस्तृत जांच में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कई चौंकाने वाले और परत-दर-परत खुलासे सामने आए हैं, जिसमें हजारों करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन और हवाला कारोबार की बात सामने आई है।
साधारण सी जूस की दुकान से शुरू हुई थी जिंदगी, चाचा के बयान के मुताबिक कभी हर महीने मिलते थे महज 15 हजार रुपये
जांच दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर के परिवार की पहले भिलाई में जूस की एक छोटी सी दुकान हुआ करती थी, जिसका नाम ‘जूस फैक्ट्री’ था। सौरभ खुद भी इसी दुकान पर बैठकर काम किया करता था। उसके चाचा के दिए गए बयानों के मुताबिक, शुरुआती दिनों में उसे इस काम के बदले हर महीने लगभग 15 हजार रुपये मिलते थे। धीरे-धीरे समय बीता और साल 2020 के अंत तक वह छोटे स्तर पर सट्टेबाजी के काम से जुड़ गया, जिसके बाद महादेव ऑनलाइन बुक का यह अवैध कारोबार बेतहाशा बढ़ता चला गया।
दुबई से संचालित होता था सट्टे का हेडक्वार्टर, सोशल मीडिया और कॉल सेंटर्स के जरिए फैलाया गया जाल
ईडी की जांच रिपोर्ट बताती है कि महादेव ऑनलाइन बुक का मुख्य मुख्यालय (Headquarters) दुबई में स्थित था, जहां से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित किया जाता था। इस कारोबार को तेजी से फैलाने के लिए विभिन्न लोगों को सट्टेबाजी के अलग-अलग ‘पैनल’ किराए पर दिए जाते थे। एक नया पैनल हासिल करने के लिए संबंधित ऑपरेटर को शुरुआत में ही लगभग 15 से 20 लाख रुपये चुकाने पड़ते थे, जिसके बाद बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, इंटरनेट और कर्मचारियों की व्यवस्था उसे खुद करनी होती थी। खिलाड़ियों को अपने जाल में फंसाने के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम और विशेष कॉल सेंटर्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता था। लोगों को भारी-भरकम बोनस और रातों-रात अमीर बनने का लालच देकर सट्टे की दुनिया में खींचा जाता था।
हजारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई का अनुमान, फर्जी बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजे गए पैसे
जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े अन्य प्लेटफॉर्म्स से हुई कुल कमाई का आंकड़ा चौंकाने वाला है। अकेले महादेव बुक से लगभग 75 से 80 हजार करोड़ रुपये, स्काई एक्सचेंज से 11 से 12 हजार करोड़ रुपये और लोटस365 से करीब 2,400 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान लगाया गया है। इन तमाम आंकड़ों को मिलाने पर यह कुल रकम लगभग 88 हजार से 94 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचती है। ईडी का दावा है कि इस काली कमाई में से करीब 4 हजार से 5 हजार करोड़ रुपये अवैध रूप से भारत से बाहर UAE में बैठे संचालकों तक पहुंचाए गए। इन पैसों को छिपाने के लिए आम लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले गए और हवाला के जरिए रकम का विदेशों में लेनदेन किया गया।
200 करोड़ रुपये की भव्य शादी और बॉलीवुड हस्तियों की मौजूदगी भी जांच के दायरे में
फरवरी 2023 में UAE के रास अल खैमाह में हुई सौरभ चंद्राकर की शादी भी इस जांच का एक अहम हिस्सा रही है। हर्षिता के साथ हुई इस शादी के तमाम कार्यक्रम 10 से 14 फरवरी के बीच आयोजित किए गए थे। ईडी के मुताबिक, इस शादी में लगभग 200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम नकद खर्च की गई थी। मेहमानों को लाने-ले जाने के लिए चार्टर्ड उड़ानों और निजी विमानों का प्रबंध किया गया था। इस आयोजन से जुड़ी इवेंट कंपनियों, होटलों और ट्रैवल एजेंटों के रिकॉर्ड खंगाले गए, जिसमें होटल, टिकट और अन्य मदों में करोड़ों रुपये खर्च होने की बात सामने आई। इस शाही शादी में कई फिल्मी और टेलीविजन जगत की हस्तियों के शामिल होने की खबरें भी आई थीं, जिन्हें पूछताछ के लिए समन भी भेजा गया था।
राजनीतिक संरक्षण और अधिकारियों की संलिप्तता के गंभीर आरोप, विभिन्न बयानों और दस्तावेजों पर हो रही है पड़ताल
इस बहुचर्चित मामले की आंच राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंची है। जांच एजेंसियों के दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि सट्टेबाजी के इस अवैध साम्राज्य को बेरोकटोक चलाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक लोगों तक भारी मात्रा में पैसे पहुंचाए गए थे। मामले से जुड़े कुछ गवाहों और आरोपियों के बयानों में करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन और राजनीतिक हस्तियों के नाम का जिक्र आया है। हालांकि, किसी का नाम प्राथमिकी या बयानों में आना मात्र से आरोप सिद्ध नहीं होता, और इन तमाम गंभीर allegations की जांच वर्तमान में CBI और ED द्वारा कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
हजारों करोड़ की संपत्तियां जब्त, ओमान से प्रत्यर्पण और कानूनी कार्रवाई लगातार जारी
ईडी की अब तक की कार्रवाई में इस मामले से जुड़ी लगभग 3,500 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है, जिसमें भारत के साथ-साथ दुबई और अन्य देशों में स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं। कानूनी और प्रत्यर्पण प्रक्रियाओं के तहत सौरभ चंद्राकर को भारत लाए जाने की कार्रवाई के बीच रायपुर की विशेष PMLA अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही है। जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही हैं कि इस बड़े सट्टेबाजी नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग और कौन से बड़े वित्तीय संस्थान शामिल थे।
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