हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा के लिए इस वर्ष प्रशासन ने सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए नियमों को और अधिक सख्त कर दिया है। यात्रा मार्ग पर अब हर श्रद्धालु के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किए किसी भी यात्री को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
🏔️ 4080 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है पवित्र धाम
मणिमहेश यात्रा हर साल भगवान शिव के पवित्र धाम, मणिमहेश झील तक आयोजित की जाती है। समुद्र तल से करीब 4080 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह यात्रा अत्यंत दुर्गम और कठिन पर्वतीय रास्तों से होकर गुजरती है। हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, जिसे देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थित यात्रा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है।
📋 क्या हैं यात्रा के नए नियम?
पिछले वर्षों में मानसून के दौरान आई प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए इस बार नियमों में विशेष बदलाव किए गए हैं:
रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए वन विभाग की पोस्ट पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।
सख्ती: यात्रा मार्ग पर प्रवेश से पहले पहचान संबंधी दस्तावेज और आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी औपचारिकताओं का पालन करना अनिवार्य है।
प्रतिबंध: यात्रा मार्ग पर प्लास्टिक का उपयोग, कूड़ा फैलाना, शॉर्टकट रास्तों का इस्तेमाल और नशे का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
निगरानी: श्रद्धालुओं को तय समय के भीतर ट्रैक पर चलने और निर्धारित मार्ग का ही पालन करना होगा।
चंबा के उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने जानकारी दी कि मणिमहेश की यात्रा हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से शुरू होकर राधा अष्टमी तक चलती है। इस बार एनजीटी (NGT) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पर्यावरण सुरक्षा के अतिरिक्त प्रबंध किए गए हैं ताकि प्राकृतिक वातावरण को कोई नुकसान न पहुँचे। प्रशासन ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी धार्मिक आस्था के अनुरूप यात्रा को पूरी तरह अनुशासन और नियमों के दायरे में रहकर पूरा करें।🗓️ कब से शुरू होगी यात्रा?
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