देवघर (झारखंड): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने देवघर में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया।
उन्होंने विशेष रूप से खनिज अधिनियम और खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) यानी MMDR संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र के दृष्टिकोण पर कड़ा ऐतराज जताया। फुरकान अंसारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी देश में दोहरे संविधान या दोहरे नियमों वाली व्यवस्था को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी और राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक लड़ाई लड़ेगी।
❌ ‘बिल देश के बेहतर भविष्य के लिए नहीं, स्वार्थ की राजनीति’: पूर्व सांसद फुरकान अंसारी का बड़ा बयान
विधेयक की मंशा और प्राथमिकताओं पर सवाल:
न्यायोचित नहीं है नया कानून: फुरकान अंसारी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया खनिज अधिनियम किसी भी दृष्टिकोण से न्यायोचित और जनहितैषी नहीं है।
निजी हितों को साधने का आरोप: उन्होंने स्पष्ट किया कि देवघर की पावन भूमि से वे कार्यकर्ताओं के साथ यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि भाजपा यह बिल देश के बेहतर भविष्य के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा कॉरपोरेट और अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए लेकर आई है।
संसाधनों पर राज्यों के अधिकार: उन्होंने कहा कि खनिज समृद्ध राज्यों के संसाधनों पर पहला हक वहां की जनता और राज्य सरकारों का होना चाहिए, जिसे यह विधेयक कमजोर करता है।
वित्तीय प्रभाव और ऐतिहासिक उदाहरण:📉 MMDR बिल से झारखंड को ₹1.58 लाख करोड़ के नुकसान का दावा: कृषि कानूनों की तरह वापसी की मांग
राजस्व को भारी चपत: पूर्व सांसद ने दावा किया कि MMDR बिल के प्रावधानों के चलते देश के कई खनिज उत्पादक राज्यों को भारी आर्थिक क्षति होगी। उन्होंने विशेष रूप से झारखंड का जिक्र करते हुए कहा कि इससे राज्य को करीब ₹1.58 लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।
संसदीय कानूनों की वापसी संभव: जब उनसे पूछा गया कि संसद से पारित होने के बाद बिल कैसे वापस हो सकता है, तो उन्होंने ऐतिहासिक किसान आंदोलन का उदाहरण दिया।
किसान आंदोलन की मिसाल: उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पूर्व में भी तीन विवादित कृषि कानून बनाए थे, लेकिन जनता और किसानों के अटूट संघर्ष के आगे झुकते हुए सरकार को वे तीनों कानून वापस लेने पड़े थे; जनदबाव से MMDR बिल भी वापस होगा।
कांग्रेस का चरणबद्ध आंदोलन और जन-जागरूकता रणनीति:✊ 7 सितंबर को रांची में बड़ा प्रदर्शन: प्रखंड और गांव स्तर तक जन-आंदोलन ले जाएगी कांग्रेस
राजधानी में आगाज: फुरकान अंसारी ने घोषणा की कि MMDR बिल के विरोध में आगामी 7 सितंबर को राजधानी रांची में एक विशाल विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।
गांव-गांव पहुंचेगा अभियान: रांची प्रदर्शन के तुरंत बाद पार्टी कार्यकर्ता प्रदेश के प्रत्येक जिले और प्रखंड में जाकर चौपालें लगाएंगे।
जनता को बताएंगे दुष्प्रभाव: अभियान के तहत आम लोगों को बताया जाएगा कि केंद्र का यह नया खनिज कानून झारखंड के आर्थिक ढांचे, स्थानीय रोजगार और राज्य के हितों के लिए कितना विनाशकारी साबित हो सकता है।
धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों पर आरोप:🕌 अयोध्या और काशी के चंदे का भी उठाया मुद्दा: जमीन सौदों पर उठाए गंभीर सवाल
मंदिरों की जमीन का मुद्दा: प्रेस वार्ता में पूर्व सांसद ने MMDR बिल के साथ-साथ अयोध्या और वाराणसी (काशी) के मंदिरों से जुड़े चंदे और जमीन प्रबंधन का विषय भी उठाया।
बाहरी कारोबारियों को लाभ देने का आरोप: उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अयोध्या के आसपास मंदिरों की संपत्तियों व जमीनों को गुजरात के व्यवसायियों के हाथों में दिया जा रहा है, जहां बड़े-बड़े वाणिज्यिक होटल और गेस्ट हाउस बनाए जा रहे हैं।
सरकार की भूमिका पर प्रश्न: उन्होंने सवाल खड़ा किया कि यदि जमीन धार्मिक न्यास और मंदिर की है, तो सरकारी हस्तक्षेप से उसे व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कैसे हस्तांतरित किया जा सकता है।
बयानबाजी और ऐतिहासिक संदर्भ:⚠️ शीर्ष नेतृत्व पर विवादित टिप्पणी: भाजपा के आरोपों पर दिया तीखा जवाब
विवादित बयान: फुरकान अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कार्यशैली की तुलना ऐतिहासिक संदर्भों से करते हुए कड़ा प्रहार किया।
मुगल काल का हवाला: भाजपा द्वारा बार-बार मुगल शासकों द्वारा मंदिर तोड़े जाने के आरोपों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की राजनीति कर दूसरे पूजा स्थलों को निशाना बनाने वाली मानसिकता को किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
संगठन और उपस्थित नेताओं का विवरण:👥 प्रेस वार्ता में कई वरिष्ठ कांग्रेसी पदाधिकारी रहे उपस्थित: पार्टी एकजुट
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी: इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान फुरकान अंसारी के साथ कांग्रेस नेता मुन्नम संजय, उदय प्रकाश, दिनेश मंडल और दिनेशानंद झा मुख्य रूप से मौजूद रहे।
सामूहिक संकल्प: सभी पदाधिकारियों ने एक सुर में केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आगामी 7 सितंबर के रांची प्रदर्शन को ऐतिहासिक और सफल बनाने का संकल्प दोहराया।
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