चंडीगढ़: पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (HVPNL) में वर्षों से संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधार पर कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग पर निगम के प्रबंध निदेशक (एमडी) को सुप्रीम कोर्ट के हालिया ‘मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य’ फैसले के आलोक में तीन महीने के भीतर उचित निर्णय लेने का कड़ा आदेश दिया है। हाई कोर्ट के इस फैसले से सालों से पक्के होने की आस लगाए बैठे सैकड़ों कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
📜 सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला: हरियाणा सरकार की 2014 की नियमितीकरण नीति को सर्वोच्च न्यायालय ने ठहराया वैध
भारत भूषण व अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार की 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति—जिसे बाद में 20 जून और 28 जुलाई 2014 की अधिसूचनाओं (Notifications) के जरिए स्पष्ट किया गया था—अब सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की ओर से पूरी तरह वैध ठहराई जा चुकी है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि जब देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस नीति पर अपनी मुहर लगा दी है, तो ऐसे में इसके दायरे में आने वाले पात्र संविदा कर्मचारियों के वैध दावों की अनदेखी बिल्कुल नहीं की जा सकती।
💻 बिना किसी सेवा-विराम के लगातार कार्यरत: हारट्रॉन के माध्यम से नियुक्त कर्मियों ने पूरी की सभी कानूनी शर्तें
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वे विभिन्न तिथियों पर पहले ‘हारट्रॉन’ (HARTRON) के माध्यम से और बाद में सीधे विद्युत प्रसारण निगम की ओर से डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में नियुक्त किए गए थे। इस नियुक्ति के बाद से वे बिना किसी सेवा-विराम (सर्विस ब्रेक) के लगातार पूरी निष्ठा से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मचारियों का मुख्य तर्क था कि वे सरकार की नियमितीकरण नीति की सभी अनिवार्य शर्तें और मापदंड पूरी करते हैं, इसके बावजूद विभाग की ओर से उन्हें अब तक स्थायी सेवा लाभ और समान कार्य-समान वेतन से वंचित रखा गया था, जो कि उनके अधिकारों का हनन है।
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