चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मंगलवार को विपक्ष का विरोध प्रदर्शन दिल्ली में भारी हंगामे में तब्दील हो गया। ‘INDIA ब्लॉक’ के 300 से अधिक सांसदों और नेताओं ने संसद भवन से चुनाव आयोग के निर्वाचन सदन तक मार्च निकाला और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगहों पर धक्का-मुक्की और तीखी झड़पें हुईं। सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने नेताओं को चुनाव आयोग तक जाने से रोक दिया और राहुल गांधी व प्रियंका गांधी को आकाशवाणी परिसर के पास रोक लिया गया, जिसके बाद से सभी नेता वहीं धरने पर बैठ गए हैं।
📢 ‘चुनाव आयुक्त हमसे क्यों नहीं मिल रहे हैं?’: राहुल गांधी का ECI और पुलिस पर तीखा हमला, कार्यकर्ताओं को लिया गया हिरासत में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर सवाल उठाया कि जब देश के 300 से ज्यादा सांसद और करोड़ों लोग अपनी बात रखना चाहते हैं, तो चुनाव आयोग के अधिकारी उनसे मिलने से क्यों बच रहे हैं। निषेधाज्ञा (बीएनएसएस धारा 163) का हवाला देते हुए पुलिस ने निर्वाचन सदन के बाहर जबरन घुसने की कोशिश कर रहे कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस बीच राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य वरिष्ठ नेता चुनाव आयोग कार्यालय से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित आकाशवाणी परिसर के अंदर ही धरने पर डटे रहे।
⚡ पवन खेड़ा और वामपंथी सांसदों ने सरकार पर बोला हमला: कहा- ‘गिरफ्तारी कोई समाधान नहीं, पीएम मोदी डरे हुए हैं’
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार पूरी तरह भयभीत है, तभी विपक्ष के नेताओं को शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपने से भी रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पास में ही है, लेकिन पुलिस बल लगाकर तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है। वहीं सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने गिरफ्तारी का विरोध करते हुए कहा कि आरएएफ, सीआरपीएफ और भारी सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद हमारा आंदोलन रुकेगा नहीं। इस विरोध प्रदर्शन में विपक्षी दलों के साथ अन्य क्षेत्रीय दल भी एकजुट होकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मुखर नजर आ रहे हैं।
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