रांची: झारखंड राज्य के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को सुचारू रूप से मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) उपलब्ध कराने वाले प्रधानाध्यापकों के सामने एक गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पिछले सात महीनों से नियमित रूप से योजना की राशि का आवंटन नहीं होने के कारण हेडमास्टर अब अपनी व्यक्तिगत बचत और मासिक वेतन के पैसों से बच्चों के भोजन का खर्च उठाने के लिए विवश हैं। स्थिति तब और अधिक जटिल हो गई है जब विभागीय भुगतान प्रक्रिया और नए वेंडर पंजीकरण के उलझे हुए नियमों ने शिक्षकों की परेशानियों को और अधिक बढ़ा दिया है। इस पूरे हालात को लेकर अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिला कार्यालयों तक पहुंच चुकी है राशि, लेकिन प्रखंड स्तर पर वेंडर पंजीकरण की प्रक्रिया अटकी
संघ से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य मुख्यालय द्वारा मध्याह्न भोजन मद की आवश्यक राशि लगभग एक महीने पहले ही संबंधित जिला कार्यालयों को हस्तांतरित की जा चुकी है, जिसके बाद इसे आगे विद्यालयों को आवंटित किया जाना था। इस प्रक्रिया के नियमों के तहत प्रत्येक प्रखंड संसाधन केंद्र में तैनात प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों द्वारा वेंडर का पंजीकरण किया जाना अनिवार्य है। विडंबना यह है कि राजधानी रांची जिले के किसी भी प्रखंड में अभी तक विद्यालयों के लिए वेंडर पंजीकरण का कार्य शुरू नहीं हो सका है, जिसके चलते पूरा भुगतान तंत्र ठप पड़ा हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नकद खरीदारी और औपचारिक बिल न होने से रिफंड पर मंडरा रहा है बड़ा संकट
हेडमास्टरों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह है कि महीनों तक अपनी जेब से पैसे लगाने के बाद भी उन्हें सीधे भुगतान मिलने की कोई गारंटी नहीं है। प्रखंड अधिकारियों के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, भुगतान केवल पंजीकृत दुकानदारों को ही किया जा सकता है। दूसरी ओर, ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में हरी सब्जियां, मसाले और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री स्थानीय हाट-बाजारों व छोटी दुकानों से पूरी तरह नकद में खरीदी जाती हैं, जहाँ से किसी भी प्रकार के औपचारिक या पक्के बिल मिलना संभव नहीं होता। ऐसे में बिना बिल के पुराने खर्चों का हिसाब देना और उनका समायोजन करना बेहद कठिन हो गया है। गैस सिलेंडर और राशन व्यापारी भी अब लंबे समय तक उधार देने से हाथ खड़े कर रहे हैं, जिससे शिक्षकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
आर्थिक और मानसिक शोषण के समान है स्थिति, अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कड़े शब्दों में कहा कि शिक्षकों से यह अपेक्षा रखना कि वे अपनी जेब से पैसे लगाकर लगातार मध्याह्न भोजन संचालित करें, उनके भारी आर्थिक और मानसिक शोषण के बराबर है। यदि वे भोजन बंद करते हैं तो उन पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकती है, और यदि वे निजी पैसों से व्यवस्था चलाते हैं तो खर्च की गई राशि के वापस मिलने की कोई निश्चिंतता नहीं है। संघ ने मांग की है कि इस जटिल भुगतान प्रक्रिया को तुरंत सरल बनाया जाए और शिक्षकों द्वारा पूर्व में खर्च की गई पूरी राशि की प्रतिपूर्ति का स्पष्ट प्रावधान किया जाए। संघ ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो अगले महीने से सभी हेडमास्टर मध्याह्न भोजन संचालन के प्रभार से खुद को पूरी तरह अलग कर लेंगे और इसके पश्चात चरणबद्ध तरीके से बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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