संगरूर (पंजाब): जिले के तूरबंजारा गांव में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की जनसभा के दौरान खुलेआम नशे (चिट्टे) की बिक्री का मुद्दा उठाने वाले 50 वर्षीय गुलजार सिंह की लुधियाना के डीएमसी (DMC) अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई।
सभा में सवाल पूछने के बाद कथित मानसिक प्रताड़ना, माफी मांगने के दबाव और धमकियों से व्यथित होकर उन्होंने सल्फास खा ली थी। इस दुखद घटना के सामने आने के बाद सूबे की सियासत में उबाल आ गया है और विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तूरबंजारा गांव में आयोजित जनसभा में गुलजार सिंह ने भरे मंच के सामने क्षेत्र में सिंथेटिक ड्रग्स (चिट्टा) की धड़ल्ले से हो रही बिक्री पर सवाल दागे थे। आरोप है कि इसके बाद स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों ने उन पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का असहनीय दबाव बनाया, जिससे आहत होकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
🏥 अस्पतालों के चक्कर काटते बीता समय: डीएमसी लुधियाना में इलाज के दौरान मौत
उपचार और रेफरल का दर्दनाक घटनाक्रम:
संगरूर से पटियाला रेफर: सल्फास खाने के बाद हालत बिगड़ने पर परिजनों ने आनन-फानन में उन्हें संगरूर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए राजिंदरा अस्पताल, पटियाला रेफर किया गया।
वेंटिलेटर न मिलने से भटकाव: पटियाला पहुंचने पर वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण परिजनों को उन्हें पुनः संगरूर के एक निजी अस्पताल लाना पड़ा।
लुधियाना में तोड़ा दम: अंततः स्थिति अत्यधिक नाजुक होने पर उन्हें डीएमसी अस्पताल, लुधियाना में दाखिल कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
मरने से पहले जारी वीडियो में लगाए गए आरोप:📱 आखिरी वीडियो में छलका दर्द: ‘बेटा चिट्टा पीता है, माफी मांगने के दबाव में खाया जहर’
वीडियो में बयां की दास्तां: सल्फास निगलने के उपरांत गुलजार सिंह ने एक भावुक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने पूरी घटना का खुलासा किया।
दर्दनाक बयान: वीडियो में उन्होंने कहा— “कल हमारे गांव में चीमा आया था, मैंने वहां सवाल किया था। मैंने चिट्टे के बारे में सवाल किया था। मेरा बेटा चिट्टा पीता है और उसने मेरा सब कुछ बेच दिया। चिट्टा बंद नहीं हुआ है। इसके बाद पंच और सरपंच घर आकर मुझ पर माफी मांगने का दबाव बना रहे थे। मैंने माफी मांगने से इनकार कर दिया और मजबूर होकर सल्फास खाई। चार लोग मेरी मौत के जिम्मेदार हैं।”
गांव वालों की गवाही: स्थानीय ग्रामीणों ने भी पुष्टि की कि गुलजार सिंह ने अपने बेटे के नशे की लत से परेशान होकर जनसभा में हिम्मत दिखाते हुए मंत्री से सवाल किया था, जिसके बाद उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।
कांग्रेस पार्टी और चरणजीत सिंह चन्नी का हमला:⚔️ पंजाब में भड़का सियासी घमासान: कांग्रेस ने ड्रग्स संकट और विज्ञापनों पर घेरा
सच्चाई छिपाने का आरोप: कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि गुलजार सिंह की मृत्यु राज्य में फैले विकराल ड्रग्स संकट का कड़वा सच है, जिसे सरकार करोड़ों रुपये के विज्ञापनों के पीछे छिपाना चाहती है। पार्टी ने इस मौत के लिए सीधे तौर पर मंत्री चीमा को जिम्मेदार ठहराया।
पूर्व सीएम चन्नी का वार: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने वीडियो जारी कर कहा कि जनता की जायज आवाज को कुचलने से सरकार अपनी विफलता से पल्ला नहीं झाड़ सकती। उन्होंने कहा कि सुनाम और संगरूर में सवाल पूछने वाले आम नागरिकों को आत्महत्या की कगार पर धकेला जा रहा है।
बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल का कड़ा रुख:🔥 ‘एक सवाल की कीमत मौत’: रवनीत बिट्टू और बिक्रम सिंह मजीठिया ने की FIR की मांग
रवनीत सिंह बिट्टू का बयान: केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ‘आप’ सरकार के शासनकाल में जनता के एक सवाल की कीमत मौत बनकर सामने आ रही है। अपने बेटे को बचाने की गुहार लगाने वाले पिता को आत्महत्या के लिए विवश किया गया। उन्होंने मांग की कि हरपाल चीमा को तुरंत कैबिनेट से बर्खास्त कर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया जाए।
बिक्रम सिंह मजीठिया का तीखा हमला: शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि अपने अंतिम बयान में गुलजार सिंह ने स्पष्ट रूप से हरपाल चीमा को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है। ऐसे में मंत्री को तत्काल पद से हटाकर जेल भेजा जाना चाहिए।
पंचायत का आधिकारिक पक्ष और सफाई:🛡️ सरपंच पक्ष ने आरोपों को बताया बेबुनियाद: ‘धमकाने की बात में कोई सच्चाई नहीं’
दबाव बनाने से इनकार: गांव की सरपंच बलजिंदर कौर सिद्धू के पति बलजीत सिंह ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि गुलजार सिंह पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं डाला गया था और न ही माफी मांगने के लिए धमकाया गया था।
आश्वासन की बात कही: बलजीत सिंह के अनुसार, जनसभा में जब गुलजार ने नशे का मुद्दा उठाया तो मंत्री चीमा और पंचायत सदस्यों ने उन्हें शांत कराते हुए नशा तस्करी पर नकेल कसने और हर संभव मदद का भरोसा दिया था।
पुराने मामले का जिक्र: उन्होंने बताया कि गुलजार बातचीत के बाद सामान्य रूप से चले गए थे और बाद में उनके द्वारा जहरीला पदार्थ खाने की सूचना मिली। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि गांव के दो अन्य युवक पूर्व में नशे की भेंट चढ़ चुके हैं।


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