लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस को करीब चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अब स्थायी डीजीपी मिलने का रास्ता साफ हो गया है। इस दिशा में नियुक्ति प्रक्रिया आज मंगलवार को दिल्ली में आयोजित होने वाली UPSC की एक अहम बैठक के साथ और आगे बढ़ेगी। इस उच्च स्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व मुख्य सचिव एसपी गोयल करेंगे। UPSC इस बैठक में यूपी पुलिस के शीर्ष पद के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का एक पैनल अंतिम रूप से तैयार करेगा, जिसे राज्य सरकार को भेजा जाएगा। इन तीन नामों में से ही राज्य सरकार अंतिम चयन कर किसी एक अधिकारी को उत्तर प्रदेश का स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त करेगी। सूत्रों की मानें तो वर्तमान में कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण का स्थायी डीजीपी बनना लगभग तय माना जा रहा है।
👤 नियुक्ति की रेस में शामिल प्रमुख दावेदार: रेणुका मिश्रा, पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण का प्रोफाइल
डीजीपी पद के पैनल में शामिल होने वाले संभावित दावेदारों का विवरण इस प्रकार है:
रेणुका मिश्रा (1990 बैच): वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर हैं। उन्होंने बीकॉम, एमए (इकोनॉमिक्स) और पुलिस प्रशासन में एमए की डिग्री प्राप्त की है। वह पूर्व में यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। मई 2021 में उन्हें डीजी पद पर पदोन्नति मिली थी, हालांकि सिपाही भर्ती पेपर लीक मामले के बाद जुलाई 2024 से वह नियमित तैनाती की प्रतीक्षा में हैं।
पीयूष आनंद (1991 बैच): वर्तमान में केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर एनडीआरएफ (NDRF) के महानिदेशक हैं। आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक और एमडीआई गुरुग्राम से पब्लिक पॉलिसी में पोस्ट-ग्रेजुएट पीयूष आनंद का लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने यूपी के 11 जिलों में कप्तानी संभाली है, साथ ही सीबीआई (CBI) में 7 साल और सीआईएसएफ (CISF) में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं।
राजीव कृष्ण (1991 बैच): वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। मई 2022 से यूपी पुलिस बिना स्थायी प्रमुख के चल रही थी, जिसे देखते हुए राजीव कृष्ण को इस पद के लिए सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
मई 2022 से उत्तर प्रदेश पुलिस का पूरा तंत्र कार्यवाहक डीजीपी के नेतृत्व में चल रहा है। करीब चार साल के लंबे अरसे के बाद राज्य को स्थायी प्रमुख मिलने से न केवल पुलिस प्रशासन में स्थिरता आएगी, बल्कि कानून-व्यवस्था को एक नई दिशा और मजबूती मिलने की उम्मीद भी है। UPSC द्वारा पैनल भेजने के बाद राज्य सरकार इन तीन नामों में से एक का चयन करेगी। अंतिम अनुमोदन के बाद, चयनित अधिकारी को स्थायी डीजीपी के रूप में आधिकारिक पदभार सौंपा जाएगा, जिससे पुलिस महकमे में लंबे समय से चल रही प्रशासनिक अनिश्चितता का दौर समाप्त होगा।🏛️ क्यों जरूरी है स्थायी डीजीपी? प्रशासन में स्थिरता और नई दिशा की उम्मीद
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