जयपुर। छत्तीसगढ़ सरकार पारसा कोल ब्लॉक में राजस्थान को खनन की अनुमति नहीं दे रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनन की अनुमति नहीं देने से राजस्थान मे 4340 मेगावाट बिजली की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने का संकट नजर आने लगा है । दोनों कांग्रेस शासित राज्य सरकारों की जंग में पार्टी आलाकमान भी हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। राजस्थान में मात्र दस दिन का कोयला स्टॉक में बचा है । ऐसे में राजस्थान में गहराते बिजली संकट में उत्तरप्रदेश सरकार ने मदद की है।
उत्तप्रदेश सरकार ने राजस्थान को 700 मेगावाट बिजली उधार देने की बात कही है ।दोनों सरकारों के अधिकारियों के बीच इस सम्बन्ध में करार हो गया । अब उत्तरप्रदेश प्रतिदिन 42 लाख यूनिट बिजली प्रतिदिन राजस्थान को देगा । हालांकि यह बिजली वापस उत्तरप्रदेश को लौटानी होगी । राजस्थान में बिजली की मांग 15 हजार मेगावाट से ज्यादा है,लेकिन उपलब्धता 12,500 मेगावाट ही है। राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को खनने मंजूरी के लिए निर्देश देने का आग्रह किया था। सूत्रों के अनुसार सोनिया ने बघेल से बात की है । लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की है। जानकारी के अनुसार अब गहलोत खुद दिल्ली जाकर सोनिया व पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं।
राजनीतिक नुकसान की आशंका
गहलोत सरकार को चिंता इस बात की है कि कोयला खनन की मंजूरी नहीं मिलती है तो राज्य को मंहगे दामों पर कोयला खरीदना होगा । अन्य राज्यों से महंगी बिजली खरीदनी होगी । ऐसा करने पर राज्य सरकार पर आर्थिक भार पड़ेगा तो बिजली के दाम बढ़ाने होंगे । महंगी बिजली मिलने से लोगों में नाराजगी बढ़ेगी । भाजपा को इसका राजनीतिक लाभ लेने का मौका मिलेगा । सोनिया ने गहलोत को लिखे पत्र में भी यही बात लिखी है। गहलोत सरकार का कहना है कि 4,300 मेगावाट के पावर प्लांट्स के लिए दिसम्बर के अंत में कोयला संकट उत्पन्न हो जाएगा । राजस्थान सरकार के संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल का कहना है कि सोनिया को प्रकरण की जानकारी रहे,इसलिए सीएम ने उन्हे पत्र लिखा है। धारीवाल ने कहा कि उपभोक्ता की हर स्तर पर मदद की जाएगी । कांग्रेस के नेता बघेल से बात करने में जुटे हैं।
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