कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बंगाल की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर आज दोबारा मतदान (Re-polling) प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर आज सुबह 7 बजे से ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण वोटिंग जारी है। इस सीट के भाग्य का फैसला आगामी 24 मई को नतीजों के साथ होगा। भौगोलिक रूप से फलता क्षेत्र दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आता है और इसे पारंपरिक रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है। मगर इस बार चुनाव से ठीक पहले यहाँ एक बड़ा और अप्रत्याशित सियासी उलटफेर देखने को मिला, जब टीएमसी के कद्दावर उम्मीदवार जहांगीर खान ने आधिकारिक वोटिंग शुरू होने से महज दो दिन पहले अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया। जहांगीर खान के इस चौंकाने वाले फैसले के बाद अब फलता का राजनीतिक रण पूरी तरह से बदल चुका है। अब यहाँ मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला के बीच माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस और बीजेपी के अलावा इस रण में सीपीआई-एम (CPI-M) के शंभुनाथ कुर्मी, निर्दलीय प्रत्याशी दीप हाटी और चंद्रकांत राय भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गौरतलब है कि इस सीट पर पहले 29 अप्रैल को नियमित वोटिंग होनी थी। लेकिन मतदान के दिन व्यापक स्तर पर हुई चुनावी धांधली और हिंसा की गंभीर रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए वहां के चुनाव को तत्काल प्रभाव से रद्द घोषित कर दिया था, जिसके बाद आज नए सिरे से मतदान कराया जा रहा है। फलता विधानसभा सीट पर पल-पल बदलते घटनाक्रम और वोटिंग से जुड़ी मुख्य लाइव अपडेट्स इस प्रकार हैं: मतदान की रफ्तार: फलता के सभी 285 मतदान केंद्रों पर सुबह से ही वोटर्स में उत्साह है। सुबह 9 बजे तक के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 20.47 फीसदी मतदान दर्ज हो चुका है।
बीजेपी की खुली किस्मत: फलता में टीएमसी के जहांगीर खान के पीछे हटने से बीजेपी प्रत्याशी देबांग्शु पांडा की किस्मत खुलती नजर आ रही है, क्योंकि बीजेपी संगठनात्मक रूप से इस सीट पर कभी नहीं जीत पाई है।
ऐन वक्त पर बड़ा फैसला: वोटिंग प्रक्रिया की शुरुआत से ठीक 48 घंटे पहले तृणमूल कांग्रेस के घोषित और मजबूत उम्मीदवार जहांगीर खान ने अपना नाम वापस लेकर सबको हैरान कर दिया।
चर्चा में रहे थे जहांगीर: चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान अपने विवादित बयानों के चलते राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रहे थे। उन्होंने आईपीएस (IPS) अजय पाल शर्मा के खिलाफ खुद को फिल्म का ‘पुष्पा’ बताते हुए कहा था कि ‘वह झुकेगा नहीं’। उनका यह वीडियो काफी वायरल हुआ था।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: मतदान में दोबारा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या बूथ कैप्चरिंग को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने सभी 285 पोलिंग स्टेशनों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की है। मुख्य वोटिंग से पहले सुबह केंद्रों पर निष्पक्षता जांचने के लिए मॉक पोल (Mock Poll) भी किया गया था।
राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि मंगलवार को जब तृणमूल कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार जहांगीर खान ने फलता सीट से चुनावी मैदान छोड़ने की घोषणा की, तभी से रणनीतिक रूप से इस सीट पर बीजेपी की ऐतिहासिक जीत लगभग तय मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का गणित कहता है कि अगर इस त्रिकोणीय मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी की जीत सुनिश्चित होती है, तो पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी विधायकों की कुल संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 208 सीटें हो जाएगी, जो विपक्ष के रूप में बीजेपी को और अधिक मजबूती देगी। फलता विधानसभा क्षेत्र का यह पूरा घटनाक्रम टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा और व्यक्तिगत झटका माना जा रहा है। यह विधानसभा सीट अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र ‘डायमंड हार्बर’ के अंतर्गत ही आती है। इस इलाके में जमीन पर जहांगीर खान की जबरदस्त राजनैतिक पैठ और कैडर वोट बैंक माना जाता था। जहांगीर को सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी का सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह सर्वविदित है कि जहांगीर ने ही लोकसभा चुनाव के दौरान अभिषेक बनर्जी के लिए चुनावी कमान संभाली थी। यही मुख्य कारण रहा था कि अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर सीट से 7,10,930 वोटों के देशव्यापी ऐतिहासिक रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि इसके विपरीत साल 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी यहाँ महज 40,000 वोटों के अंतर से ही जीत पाई थी। अब जहांगीर के इस बागी रुख या पीछे हटने के पीछे क्या कारण हैं, इसका सच चुनाव के अंतिम नतीजों के बाद ही साफ हो पाएगा।
⚔️ टीएमसी के मैदान छोड़ने से खुला चुनावी मुकाबला: बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक के बीच सीधी टक्कर
📈 फलता सीट से चुनावी LIVE Updates: सुबह 9 बजे तक दर्ज हुआ 20.47% मतदान, बूथों पर लगी लंबी कतारें
🗳️ अगर पांडा जीते तो बंगाल में बीजेपी की बढ़ेंगी सीटें: कुल आंकड़ा 208 तक पहुंचने का अनुमान
💥 टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका: डायमंड हार्बर में जहांगीर के भरोसे दर्ज की थी रिकॉर्ड जीत
यह खबर आपको कैसी लगी?
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। बंगाल की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर आज दोबारा मतदान (Re-polling) प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर आज सुबह 7 बजे से ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण वोटिंग जारी है। इस सीट के भाग्य का फैसला आगामी 24 मई को नतीजों के साथ होगा। भौगोलिक रूप से फलता क्षेत्र दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आता है और इसे पारंपरिक रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है। मगर इस बार चुनाव से ठीक पहले यहाँ एक बड़ा और अप्रत्याशित सियासी उलटफेर देखने को मिला, जब टीएमसी के कद्दावर उम्मीदवार जहांगीर खान ने आधिकारिक वोटिंग शुरू होने से महज दो दिन पहले अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया।
⚔️ टीएमसी के मैदान छोड़ने से खुला चुनावी मुकाबला: बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक के बीच सीधी टक्कर
जहांगीर खान के इस चौंकाने वाले फैसले के बाद अब फलता का राजनीतिक रण पूरी तरह से बदल चुका है। अब यहाँ मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला के बीच माना जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस और बीजेपी के अलावा इस रण में सीपीआई-एम (CPI-M) के शंभुनाथ कुर्मी, निर्दलीय प्रत्याशी दीप हाटी और चंद्रकांत राय भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गौरतलब है कि इस सीट पर पहले 29 अप्रैल को नियमित वोटिंग होनी थी। लेकिन मतदान के दिन व्यापक स्तर पर हुई चुनावी धांधली और हिंसा की गंभीर रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए वहां के चुनाव को तत्काल प्रभाव से रद्द घोषित कर दिया था, जिसके बाद आज नए सिरे से मतदान कराया जा रहा है।
📈 फलता सीट से चुनावी LIVE Updates: सुबह 9 बजे तक दर्ज हुआ 20.47% मतदान, बूथों पर लगी लंबी कतारें
फलता विधानसभा सीट पर पल-पल बदलते घटनाक्रम और वोटिंग से जुड़ी मुख्य लाइव अपडेट्स इस प्रकार हैं:
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मतदान की रफ्तार: फलता के सभी 285 मतदान केंद्रों पर सुबह से ही वोटर्स में उत्साह है। सुबह 9 बजे तक के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 20.47 फीसदी मतदान दर्ज हो चुका है।
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बीजेपी की खुली किस्मत: फलता में टीएमसी के जहांगीर खान के पीछे हटने से बीजेपी प्रत्याशी देबांग्शु पांडा की किस्मत खुलती नजर आ रही है, क्योंकि बीजेपी संगठनात्मक रूप से इस सीट पर कभी नहीं जीत पाई है।
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ऐन वक्त पर बड़ा फैसला: वोटिंग प्रक्रिया की शुरुआत से ठीक 48 घंटे पहले तृणमूल कांग्रेस के घोषित और मजबूत उम्मीदवार जहांगीर खान ने अपना नाम वापस लेकर सबको हैरान कर दिया।
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चर्चा में रहे थे जहांगीर: चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान अपने विवादित बयानों के चलते राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रहे थे। उन्होंने आईपीएस (IPS) अजय पाल शर्मा के खिलाफ खुद को फिल्म का ‘पुष्पा’ बताते हुए कहा था कि ‘वह झुकेगा नहीं’। उनका यह वीडियो काफी वायरल हुआ था।
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सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: मतदान में दोबारा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या बूथ कैप्चरिंग को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने सभी 285 पोलिंग स्टेशनों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की है। मुख्य वोटिंग से पहले सुबह केंद्रों पर निष्पक्षता जांचने के लिए मॉक पोल (Mock Poll) भी किया गया था।
🗳️ अगर पांडा जीते तो बंगाल में बीजेपी की बढ़ेंगी सीटें: कुल आंकड़ा 208 तक पहुंचने का अनुमान
राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि मंगलवार को जब तृणमूल कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार जहांगीर खान ने फलता सीट से चुनावी मैदान छोड़ने की घोषणा की, तभी से रणनीतिक रूप से इस सीट पर बीजेपी की ऐतिहासिक जीत लगभग तय मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का गणित कहता है कि अगर इस त्रिकोणीय मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी की जीत सुनिश्चित होती है, तो पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी विधायकों की कुल संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 208 सीटें हो जाएगी, जो विपक्ष के रूप में बीजेपी को और अधिक मजबूती देगी।
💥 टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका: डायमंड हार्बर में जहांगीर के भरोसे दर्ज की थी रिकॉर्ड जीत
फलता विधानसभा क्षेत्र का यह पूरा घटनाक्रम टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा और व्यक्तिगत झटका माना जा रहा है। यह विधानसभा सीट अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र ‘डायमंड हार्बर’ के अंतर्गत ही आती है। इस इलाके में जमीन पर जहांगीर खान की जबरदस्त राजनैतिक पैठ और कैडर वोट बैंक माना जाता था। जहांगीर को सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी का सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह सर्वविदित है कि जहांगीर ने ही लोकसभा चुनाव के दौरान अभिषेक बनर्जी के लिए चुनावी कमान संभाली थी। यही मुख्य कारण रहा था कि अभिषेक बनर्जी ने डायमंड हार्बर सीट से 7,10,930 वोटों के देशव्यापी ऐतिहासिक रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि इसके विपरीत साल 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी यहाँ महज 40,000 वोटों के अंतर से ही जीत पाई थी। अब जहांगीर के इस बागी रुख या पीछे हटने के पीछे क्या कारण हैं, इसका सच चुनाव के अंतिम नतीजों के बाद ही साफ हो पाएगा।


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