नई दिल्ली: द्रिक पंचांग के अनुसार, आज स्कंद षष्ठी का पावन व्रत है। यह व्रत हर माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से न केवल शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
🍇 भगवान कार्तिकेय को अर्पित करें ये प्रिय भोग
भगवान कार्तिकेय को प्रसन्न करने के लिए पूजा के दौरान विशेष भोग लगाने का बड़ा महत्व है:
मोदक: यह भगवान कार्तिकेय को अत्यंत प्रिय है। आप विभिन्न प्रकार के मोदक बनाकर उन्हें भोग लगा सकते हैं।
पंचामृत: दूध, दही, शहद, घी और केसर का मिश्रण बनाकर भगवान को अर्पित करें।
ताजे फल: सेब, केला, अंगूर और संतरा जैसे फल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
खीर और मिठाई: दूध से बनी मिठाइयां जैसे रबड़ी या खीर का भोग लगाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
भगवान को भोग लगाते समय शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। भोग हमेशा साफ हाथों से तैयार करें और स्वच्छ बर्तनों का ही उपयोग करें। मंदिर में भोग रखने से पहले धूप-दीप दिखाएं, फिर भगवान के सामने रखकर श्रद्धापूर्वक आरती करें। अंत में, इस भोग को प्रसाद के रूप में स्वयं ग्रहण करें और अन्य भक्तों में भी वितरित करें।⚠️ भोग लगाने के महत्वपूर्ण नियम
✨ स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व
स्कंद षष्ठी का व्रत मन को शांति प्रदान करता है और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। इस दिन भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं और जीवन में आने वाली सभी कठिनाइयां दूर हो जाती हैं।
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