नई दिल्ली: आज देशभर में अधिकमास की अमावस्या मनाई जा रही है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे ‘सोमवती अमावस्या’ का विशेष दर्जा प्राप्त है। यह दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए दान, जप और तप का फल हजार गुना अधिक मिलता है।
⏲️ पूजा और तर्पण का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज का दिन आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम है:
ब्रह्म मुहूर्त स्नान: प्रातः 4:00 से 5:30 बजे तक (अत्यंत उत्तम)।
पितृ तर्पण का समय: सुबह 6:00 से 8:00 बजे के बीच।
ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।🙏 सरल पूजा विधि: ऐसे करें प्रभु की आराधना
पूजा घर को स्वच्छ कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
विष्णु जी को पीले पुष्प, चंदन, अक्षत और धूप अर्पित करें।
घी का दीपक जलाकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
पूजा के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का निरंतर जाप करें।
सोमवती अमावस्या पर किए गए दान से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि शनि दोष का प्रभाव भी कम होता है। इस दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार काला तिल, अक्षत, गेहूं, वस्त्र, जूते-छाते और गाय को चारा खिलाने जैसी वस्तुएं दान कर सकते हैं।🤲 अमावस्या पर दान का विशेष महत्व
🌀 अधिकमास: मोक्ष प्रदान करने वाला पुरुषोत्तम मास
अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) भगवान विष्णु को समर्पित है। बृहन्नारदीय पुराण के अनुसार, यह मास निष्काम कर्म और मोक्ष देने वाला है। भगवान श्रीकृष्ण के वचनों के अनुसार, जो व्यक्ति इस मास में श्रद्धापूर्वक विष्णु जी की आराधना करता है, वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर परमपद को प्राप्त करता है। यह मास जप, तप और दान के माध्यम से समस्त कष्टों को दूर करने का एक सुनहरा अवसर है।
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