अमृतसर में विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पी.एस.पी.सी.एल. (PSPCL) डिवीजन गुरदासपुर में तैनात अकाउंटेंट अमृतपाल सिंह को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो थाना अमृतसर में मामला दर्ज कर आगामी कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
📁 क्या था पूरा मामला?
यह रिश्वतखोरी का मामला विभाग से सेवानिवृत्त हुए एक जूनियर इंजीनियर (JE) के महंगाई भत्ते और वेतन निर्धारण (Pay Fixation) के बकाए से जुड़ा है। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी अकाउंटेंट पिछले डेढ़ साल से उनका काम अटकाए हुए था और बकाया राशि जारी करने की एवज में लगातार 15 हजार रुपये की मांग कर रहा था। परेशान होकर पीड़ित ने आरोपी से हुई बातचीत को रिकॉर्ड किया और विजिलेंस ब्यूरो अमृतसर को सूचित किया।
🕵️ विजिलेंस का जाल और गिरफ्तारी
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस ब्यूरो रेंज अमृतसर ने एक टीम गठित की और जाल बिछाया। दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में जैसे ही अकाउंटेंट अमृतपाल सिंह ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम ली, विजिलेंस टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। टीम ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। विजिलेंस के अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
संपादकीय टिप्पणी: सरकारी कार्यालयों में आम जनता और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से छोटे-छोटे कार्यों के लिए रिश्वत मांगना एक गंभीर सामाजिक बुराई है। क्या आपको लगता है कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को तुरंत सेवा से बर्खास्त कर देना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।
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