चंडीगढ़: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने गुरुग्राम व नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का सामानांतर लाइसेंस दिए जाने और बिजली कर्मचारियों द्वारा इसका कड़ा विरोध किए जाने के प्रश्न पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि “वह स्वयं बिजली निजीकरण के खिलाफ हैं और इसीलिए उनके विभाग ने हरियाणा बिजली विनियामक आयोग के समक्ष पूरी दृढ़ता से इसका विरोध किया था, जो कि लिखित में दर्ज है और इसके तमाम दस्तावेज कोई भी हासिल कर सकता है कि हमने क्या पक्ष रखा था”. उन्होंने कहा कि “विनियामक आयोग ने अपना फैसला दे दिया है और अब हम इसके खिलाफ आगे अपील करेंगे, तथा हम न्याय पाने के लिए आखिरी सिरे तक पूरी तरह से जाएंगे”. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उन्होंने बिजली कर्मचारी नेताओं को दोपहर तीन बजे अपने दफ्तर में बैठक के लिए आमंत्रित किया है, क्योंकि उन्होंने पहले भी बैठकर कर्मचारियों से चर्चा की थी और अब यदि कोई बेहतर समाधान होगा तो उसे साझा किया जाए, जिसे वे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं. पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब विपक्ष द्वारा यह सवाल पूछा गया कि भाजपा बताए कि एसआईआर (SIR) में कुल कितने घुसपैठियों की पहचान की गई है, तो ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि “यह सवाल विपक्ष को चुनाव आयोग से पूछना चाहिए, क्या भाजपा थोड़ी न मतदाता सूची तैयार करती है”. उन्होंने कहा कि विपक्ष पूरी तरह से अपनी दिशा से भटक चुका है, क्योंकि मतदाता सूची बनाने और उसमें सुधार करने का अधिकार तथा कार्य केवल चुनाव आयोग का होता है, जो जनता को अपनी वोट ठीक करने का उचित अवसर प्रदान करता है. विज ने आगे कहा कि जो राजनीतिक दल इस तरह के बेतुके बयान दे रहे हैं, उसका साफ मतलब यह है कि या तो उनके पास काम करने के लिए जमीन पर कार्यकर्ता नहीं हैं या फिर वे पूरी तरह से निकम्मे हैं, वरना पार्टी के कार्यकर्ता खुद घर-घर जाकर लोगों को बताते हैं कि नई वोटें कैसे बन रही हैं. अनिल विज ने तंज कसते हुए कहा कि मतदाता सूची में संशोधन का यह कार्य करीब 23 साल बाद हो रहा है, और इस लंबे अंतराल में न जाने कितने लोगों की मृत्यु हो चुकी है, कितनों की पुरानी वोटें कट चुकी हैं, और यह सारा काम चुनाव आयोग की देखरेख में होता है. उन्होंने कहा कि इस बीच न जाने कितने लोगों की शादियां हो चुकी हैं और कई सरकारी या गैर-सरकारी कर्मचारी तबादला होकर अन्य स्थानों पर जा चुके हैं. देश के हर नागरिक की केवल एक ही वैध वोट हो, यह सुनिश्चित करना पूरी तरह से चुनाव आयोग का काम है और आयोग अपना यह संवैधानिक धर्म पूरी ईमानदारी से निभा रहा है. विज ने अंत में सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी की मृत्यु हो जाए या शादी होने पर महिला का नाम दूसरे स्थान पर जुड़ जाए और लोग खुद समय पर नाम न कटवाएं या बाहर से आने वाले लोग अपना नाम न जुड़वाएं, तो इसमें भी विपक्ष केवल चुनाव आयोग को ही दोष देता रहता है, जबकि कानून के नियमों के तहत जब भी रिवीजन की प्रक्रिया होती है, तो उसके बाद एक निश्चित समय (माह) का मौका दिया जाता है.🗳️ विपक्ष के SIR वाले सवालों पर विज का पलटवार, कहा— मतदाता सूची तैयार करना और सुधारना चुनाव आयोग का काम है
📋 23 साल बाद हो रहा है बड़ा संशोधन, चुनाव आयोग निभा रहा है अपना संवैधानिक धर्म
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चंडीगढ़: हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने गुरुग्राम व नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का सामानांतर लाइसेंस दिए जाने और बिजली कर्मचारियों द्वारा इसका कड़ा विरोध किए जाने के प्रश्न पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि “वह स्वयं बिजली निजीकरण के खिलाफ हैं और इसीलिए उनके विभाग ने हरियाणा बिजली विनियामक आयोग के समक्ष पूरी दृढ़ता से इसका विरोध किया था, जो कि लिखित में दर्ज है और इसके तमाम दस्तावेज कोई भी हासिल कर सकता है कि हमने क्या पक्ष रखा था”. उन्होंने कहा कि “विनियामक आयोग ने अपना फैसला दे दिया है और अब हम इसके खिलाफ आगे अपील करेंगे, तथा हम न्याय पाने के लिए आखिरी सिरे तक पूरी तरह से जाएंगे”. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उन्होंने बिजली कर्मचारी नेताओं को दोपहर तीन बजे अपने दफ्तर में बैठक के लिए आमंत्रित किया है, क्योंकि उन्होंने पहले भी बैठकर कर्मचारियों से चर्चा की थी और अब यदि कोई बेहतर समाधान होगा तो उसे साझा किया जाए, जिसे वे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं.
🗳️ विपक्ष के SIR वाले सवालों पर विज का पलटवार, कहा— मतदाता सूची तैयार करना और सुधारना चुनाव आयोग का काम है
पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब विपक्ष द्वारा यह सवाल पूछा गया कि भाजपा बताए कि एसआईआर (SIR) में कुल कितने घुसपैठियों की पहचान की गई है, तो ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि “यह सवाल विपक्ष को चुनाव आयोग से पूछना चाहिए, क्या भाजपा थोड़ी न मतदाता सूची तैयार करती है”. उन्होंने कहा कि विपक्ष पूरी तरह से अपनी दिशा से भटक चुका है, क्योंकि मतदाता सूची बनाने और उसमें सुधार करने का अधिकार तथा कार्य केवल चुनाव आयोग का होता है, जो जनता को अपनी वोट ठीक करने का उचित अवसर प्रदान करता है. विज ने आगे कहा कि जो राजनीतिक दल इस तरह के बेतुके बयान दे रहे हैं, उसका साफ मतलब यह है कि या तो उनके पास काम करने के लिए जमीन पर कार्यकर्ता नहीं हैं या फिर वे पूरी तरह से निकम्मे हैं, वरना पार्टी के कार्यकर्ता खुद घर-घर जाकर लोगों को बताते हैं कि नई वोटें कैसे बन रही हैं.
📋 23 साल बाद हो रहा है बड़ा संशोधन, चुनाव आयोग निभा रहा है अपना संवैधानिक धर्म
अनिल विज ने तंज कसते हुए कहा कि मतदाता सूची में संशोधन का यह कार्य करीब 23 साल बाद हो रहा है, और इस लंबे अंतराल में न जाने कितने लोगों की मृत्यु हो चुकी है, कितनों की पुरानी वोटें कट चुकी हैं, और यह सारा काम चुनाव आयोग की देखरेख में होता है. उन्होंने कहा कि इस बीच न जाने कितने लोगों की शादियां हो चुकी हैं और कई सरकारी या गैर-सरकारी कर्मचारी तबादला होकर अन्य स्थानों पर जा चुके हैं. देश के हर नागरिक की केवल एक ही वैध वोट हो, यह सुनिश्चित करना पूरी तरह से चुनाव आयोग का काम है और आयोग अपना यह संवैधानिक धर्म पूरी ईमानदारी से निभा रहा है. विज ने अंत में सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी की मृत्यु हो जाए या शादी होने पर महिला का नाम दूसरे स्थान पर जुड़ जाए और लोग खुद समय पर नाम न कटवाएं या बाहर से आने वाले लोग अपना नाम न जुड़वाएं, तो इसमें भी विपक्ष केवल चुनाव आयोग को ही दोष देता रहता है, जबकि कानून के नियमों के तहत जब भी रिवीजन की प्रक्रिया होती है, तो उसके बाद एक निश्चित समय (माह) का मौका दिया जाता है.


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