सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने गुरुवार को देश भर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दो घंटे का मौन आंदोलन किया. उनका यह शांतिपूर्ण आंदोलन सुबह 11 बजे शुरू हुआ था, जो दोपहर 1 बजे समाप्त हुआ. अन्ना हजारे ने अहिल्यानगर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के समीप बैठकर यह विरोध प्रदर्शन किया और उसके बाद वह इसी जिले में स्थित अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए. इससे पहले उन्होंने बीते बुधवार को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि छात्रों पर होने वाली हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें बेहद पीड़ादायक हैं.
✉️ पीएम मोदी को लिखे पत्र में बोले अन्ना- ‘इस्तीफा मांगने से नहीं गिरेगी सरकार, कार्यप्रणाली बनेगी जवाबदेह’
अन्ना हजारे ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि देश भर के प्रदर्शनकारियों के असंतोष को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे समाज की गहरी पीड़ा और जनता की अपेक्षाओं के रूप में समझा जाना चाहिए. उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का प्रत्यक्ष रूप से नाम लिए बिना कहा कि यदि किसी मंत्री से उनके पद से इस्तीफा देने की मांग की जाती है, तो इससे कोई सरकार नहीं गिर जाएगी, बल्कि ऐसा करने से सरकार की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनेगी. उन्होंने केंद्र सरकार से पुरजोर आग्रह किया है कि वह प्रदर्शनकारी छात्रों की बात को धैर्यपूर्वक सुने, आपसी विश्वास का एक मजबूत माहौल बनाए और सकारात्मक संवाद के माध्यम से इस गतिरोध का समाधान तलाशे.
💔 22 छात्रों की आत्महत्या की खबरों पर जताई गहरी चिंता, निचले स्तर के अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ने की आलोचना
मीडिया रिपोर्ट्स और नीट (NEET) परीक्षा का विशेष जिक्र करते हुए अन्ना हजारे ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं के गंभीर आरोप वर्ष 2024 और उसके बाद 2026 में भी लगातार सामने आए हैं. उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द होने के बाद देश के 22 छात्रों द्वारा कथित तौर पर आत्महत्या किए जाने की हृदयविदारक खबरों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की है. अन्ना हजारे ने यह भी लिखा कि जब-जब इस तरह की व्यवस्थागत अनियमितताएं या बड़े घोटाले सामने आते हैं, तब-तब अक्सर पूरी जिम्मेदारी निचले स्तर के छोटे अधिकारियों पर मढ़ दी जाती है, जबकि सरकार अच्छे और सकारात्मक परिणामों का पूरा श्रेय खुद ले लेती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को कानून-व्यवस्था का मामला मानने के बजाय पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ जवाब देना चाहिए.
🤝 “सरकार छात्रों से बात करने को पूरी तरह तैयार” – केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह
उधर, इस पूरे ज्वलंत मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सरकार की तरफ से हम हर संभव चर्चा करने को पूरी तरह तैयार हैं और सरकार छात्रों से बातचीत करने के लिए राजी है. उन्होंने जानकारी दी कि कल दोपहर से लेकर आज दोपहर तक छात्रों को बातचीत के लिए कुल 4 बार आधिकारिक प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस संवेदनशील विषय को लेकर बेहद गंभीर हैं, इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक आग्रह करता हूं कि छात्र आगे आएं, बैठें और इस पर खुलकर चर्चा करें. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार छात्रों की जायज शर्तों पर भी बातचीत करने के लिए तैयार है.
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