भोपाल (मध्य प्रदेश): खुद को ट्रेनी आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश टूरिज्म विभाग की एडिशनल डायरेक्टर बताकर करोड़ों की ठगी करने के आरोपों में घिरी तृप्ति सिंह राजपूत और उसके सगे भाई सुधांशु सिंह को बागसेवनिया थाना पुलिस चंदेरी (अशोकनगर) से प्रोडक्शन वारंट पर भोपाल लेकर पहुंची।
चिकित्सीय परीक्षण (मेडिकल टेस्ट) कराने के उपरांत दोनों आरोपियों को भोपाल जिला न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस ने विस्तृत पूछताछ और साक्ष्य जुटाने के लिए 5 दिन की पुलिस रिमांड मांगी थी, किंतु अदालत ने दोनों को 7 सितंबर तक 4 दिन की पुलिस अभिरक्षा (रिमांड) में सौंपने का आदेश दिया। दोनों पर भोपाल में ही करीब ₹90 लाख की धोखाधड़ी के गंभीर आरोप दर्ज हैं।
💼 चंदेरी में नौकरी के नाम पर ₹9.80 लाख का फ्रॉड: भाई बनता था केंद्र सरकार का अफसर
चंदेरी में दर्ज मामला और कार्यप्रणाली:
चंदेरी पुलिस की गिरफ्तारी: फर्जी आईएएस तृप्ति सिंह और उसका भाई सुधांशु पहले से अशोकनगर जिले के चंदेरी थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार थे।
नौकरी का झांसा: चंदेरी में दोनों ने एक बेरोजगार युवक को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ₹9.80 लाख ऐंठ लिए थे।
फर्जी पदवियां: तृप्ति लोगों पर रौब झाड़ने के लिए खुद को मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की अपर निदेशक (एडिशनल डायरेक्टर) बताती थी, जबकि भाई सुधांशु खुद को भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय का वरिष्ठ अधिकारी बताता था।
भोपाल में दर्ज मामलों का ब्योरा:🏨 भोपाल के बागसेवनिया थाने में 2 FIR दर्ज: टूरिज्म के होटल-रिसॉर्ट लीज के नाम पर ठगे ₹89 लाख
पहला मामला (रोहित लिल्हारे): बालाघाट निवासी रोहित लिल्हारे की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें तृप्ति, सुधांशु और प्रखर सिंह पर एमपी टूरिज्म के होटल-रिसॉर्ट 30 साल की लीज पर दिलाने के नाम पर ₹35.30 लाख और नौकरी लगवाने के नाम पर ₹3.87 लाख (कुल ₹39.17 लाख) हड़पने का आरोप है।
दूसरा मामला (गगन उपवंशी): सिवनी निवासी गगन उपवंशी की शिकायत पर दूसरा केस दर्ज हुआ। आरोपियों ने पीड़ित को मध्य प्रदेश टूरिज्म का होटल लीज पर दिलवाने का झांसा देकर ₹50 लाख ऐंठ लिए।
कुल ठगी: केवल बागसेवनिया थाने में ही दर्ज दोनों मामलों में ठगी की कुल राशि ₹89.17 लाख तक पहुंचती है।
जांच का दायरा और पुलिसिया पड़ताल:🔍 रिमांड के दौरान 6 अहम बिंदुओं पर होगी पूछताछ: टीआई अमित सोनी ने दी जानकारी
बैंक खातों का मिलान: बागसेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी के अनुसार, पुलिस टीम यह पता लगाएगी कि लीज और नौकरी के नाम पर ली गई भारी-भरकम राशि किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।
सिंडिकेट का नेटवर्क: फर्जी आईएएस और केंद्र सरकार के अधिकारी की फर्जी पहचान, दस्तावेज, फर्जी मोहरें और विजिटिंग कार्ड बनाने में किन प्रिंटर्स या दलालों ने मदद की।
फर्जी दस्तावेज निर्माण: जाली सीबीआई पहचान पत्र और सरकारी विभागों के लेटरहेड कहां और किसके सहयोग से तैयार किए गए।
अन्य पीड़ितों की तलाश: इस संगठित गिरोह द्वारा अब तक कितने अन्य युवाओं और कारोबारियों को शिकार बनाया जा चुका है, इसकी पड़ताल की जाएगी।
दर्ज मामलों की स्थिति:📁 तृप्ति के खिलाफ अब तक 4 आपराधिक केस दर्ज: भोपाल और अशोकनगर में दो-दो FIR
चार मुकदमों की फेहरिस्त: आरोपी तृप्ति सिंह के खिलाफ अब तक कुल चार गंभीर आपराधिक मुकदमे सामने आ चुके हैं, जिनमें दो अशोकनगर के चंदेरी में और दो भोपाल के बागसेवनिया थाने में दर्ज हैं।
सह-आरोपियों की तलाश: पुलिस अब यह खंगाल रही है कि तृप्ति और उसके भाई सुधांशु के अलावा इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट में और कौन-कौन से सफेदपोश लोग जुड़े हुए हैं।
जब्त सामग्री और साक्ष्य:🚔 फर्जी CBI कार्ड और ‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा बरामद: मोमेंटो और लेटरहेड जब्त
वीआईपी ठाठ-बाट: चंदेरी पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक छापेमारी में तृप्ति के भोपाल स्थित ठिकानों से फर्जी सीबीआई कार्ड, जाली सरकारी लेटरहेड, ट्रेनी आईएएस के नाम वाले मोमेंटो और ‘भारत सरकार’ (Government of India) लिखी लग्जरी इनोवा कार बरामद हुई थी।
साक्ष्यों की कड़ियां: बागसेवनिया पुलिस अब इन सभी जब्त दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और विधिक साक्ष्यों को भोपाल में दर्ज मामलों की केस डायरी से जोड़कर कोर्ट में मजबूत चार्जशीट पेश करने की तैयारी में है।
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