भोपाल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के चलते मानसून ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। बीते दो दिनों से हो रही अनवरत बारिश के कारण प्रदेश के कई जिलों में नदी-नाले उफान पर पहुंच गए हैं और निचले इलाकों में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है।
मौसम विभाग ने आगामी 48 घंटों के दौरान प्रदेश के 28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की गंभीर चेतावनी जारी की है। सबसे अधिक चिंता उन संवेदनशील इलाकों को लेकर है जहां मूसलाधार वर्षा के चलते अचानक बाढ़ (Flash Flood) का खतरा बढ़ गया है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान के पार बह रही है, वहीं मंडला और जबलपुर में नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। छतरपुर, पन्ना और मैहर में भी बाढ़ जैसे हालात निर्मित हो चुके हैं।
⚠️ राजगढ़, नर्मदापुरम और सागर समेत 9 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट: 3 से 5 सितंबर तक रहेगा असर
मौसम विभाग द्वारा जारी जिलावार चेतावनी:
अति भारी बारिश वाले 9 जिले: मौसम विज्ञान केंद्र ने राजगढ़, नर्मदापुरम, गुना, शिवपुरी, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में बहुत तेज से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
भारी बारिश के दायरे में अन्य जिले: भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, बैतूल, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर, मंदसौर, अशोकनगर, ग्वालियर, दतिया, भिंड, श्योपुर, रीवा, सतना, छिंदवाड़ा और पन्ना में तेज बारिश की चेतावनी दी गई है।
समय सीमा: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 3 से 5 सितंबर के दौरान राज्य भर में वर्षा का यह तीव्र दौर पूरी सक्रियता से जारी रहेगा।
बाढ़ के प्रति संवेदनशील जिले:🌊 22 जिलों में अचानक बाढ़ (Flash Flood) का संकट: नदी-नालों के आसपास रहने वालों को सतर्कता के निर्देश
पूर्वी मध्य प्रदेश: दमोह, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, नरसिंहपुर, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, सिवनी, छिंदवाड़ा और टीकमगढ़ में जलभराव और अचानक नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश: अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर और बैतूल के जलग्रहण क्षेत्रों को भी अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
प्रशासनिक सतर्कता: स्थानीय प्रशासन ने नदी तटों और जलभराव वाले क्षेत्रों में होमगार्ड व एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं।
जलाशयों की स्थिति और डाउनस्ट्रीम अलर्ट:🚪 कुटनी और बरगी बांध से छोड़ा गया पानी: मंदाकिनी नदी खतरे के निशान के पार
मंदाकिनी व नर्मदा का स्तर: चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने से घाट जलमग्न हो गए हैं। मंडला और डिंडौरी में नर्मदा का वेग काफी तेज हो गया है।
डैमों के खुले गेट: जलस्तर नियंत्रित करने के लिए छतरपुर स्थित कुटनी बांध और जबलपुर के बरगी बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ा जा रहा है।
डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में निगरानी: बांधों से भारी मात्रा में जल निष्कासन के कारण निचले तटीय क्षेत्रों में जलस्तर और अधिक बढ़ने का जोखिम है, जिसके चलते तटवर्ती बस्तियों में मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है।
वर्षा के पीछे सक्रिय मौसम प्रणाली:🌀 डिप्रेशन सिस्टम ने बढ़ाई मानसूनी सक्रियता: मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा का विश्लेषण
निम्न दबाव का प्रभाव: मौसम विज्ञानी अरुण शर्मा के अनुसार, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और उससे सटे भूभाग पर एक चिह्नित निम्न दबाव का क्षेत्र (Marked Low Pressure Area) बना हुआ है।
गंभीर मौसमी गतिविधियां: इस सिस्टम के प्रभाव से अगले 24 से 48 घंटे राज्य के लिए बेहद अहम हैं। कई इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, आकाशीय बिजली चमकने और स्थानीय स्तर पर भारी जलभराव की स्थिति बन सकती है।
सीजन की बारिश का सांख्यिकीय ब्योरा:📊 प्रदेश में 4 सितंबर तक 29.2 इंच बारिश दर्ज: सामान्य से 8 प्रतिशत कम रहा आंकड़ा
औसत वर्षा का स्तर: भारी बारिश के बावजूद समूचे सीजन का कुल वर्षा आंकड़ा अब भी सामान्य कोटे से नीचे बना हुआ है। 4 सितंबर तक राज्य में लगभग 29.2 इंच औसत बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य की तुलना में करीब 8 प्रतिशत कम है।
माहवार स्थिति: जून के महीने में राज्य में बारिश का भारी अभाव रहा था, जिसकी भरपाई जुलाई और अगस्त की वर्षा ने आंशिक रूप से की। अब सितंबर के पहले सप्ताह में बने इस मजबूत चक्रवाती तंत्र से कमी के पूरी तरह दूर होने की संभावना है।
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