रांची: देश के प्रमुख वित्तीय संस्थान आईडीबीआई बैंक के निजीकरण और केंद्र सरकार तथा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की संयुक्त रूप से 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के फैसले के विरोध में देशव्यापी आंदोलन की आंच अब झारखंड तक पहुँच चुकी है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर राज्य के बैंककर्मियों और बीमा कर्मचारियों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। इससे पहले जमशेदपुर और बोकारो में विरोध दर्ज कराने के बाद, अब झारखंड की राजधानी रांची में भी बैंक कर्मचारियों ने इसके खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है। शहर की विभिन्न आईडीबीआई बैंक शाखाओं के बाहर कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण धरना देकर इस निजीकरण के फैसले पर अपनी गहरी नाराजगी जाहिर की है।
रांची के मेन रोड स्थित बैंक शाखा के सामने कर्मचारियों का जोरदार प्रदर्शन, विदेशी कंपनी को हिस्सेदारी सौंपने के फैसले पर जताई चिंता
मंगलवार को रांची के व्यस्त मेन रोड स्थित आईडीबीआई बैंक शाखा के बाहर, एकरा मस्जिद और रतन सिनेमा के समीप कर्मचारियों नेजबरदस्त धरना प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए बैंककर्मियों ने केंद्र सरकार के इस कदम को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग ढांचे और जनहित के खिलाफ करार देते हुए इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की जोरदार मांग की। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का तर्क है कि बैंक की बहुसंख्यक हिस्सेदारी किसी विदेशी निजी कंपनी को सौंप दिए जाने से बैंक की भविष्य की नीतियों, सेवारत कर्मचारियों के भविष्य के साथ-साथ आम ग्राहकों के हितों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेची जा रही है 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी, मुनाफे में चल रहे बैंक के निजीकरण पर उठ रहे सवाल
विदित हो कि केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी को मिलाकर कुल 60.72 प्रतिशत शेयर कनाडा की प्रसिद्ध कंपनी ‘फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स’ को बेचे जाने की प्रक्रिया चल रही है, जिसका विरोध किया जा रहा है। इस प्रस्तावित पूरे सौदे की कुल कीमत लगभग 52,878 करोड़ रुपये आंकी गई है। आंदोलन कर रहे बैंक कर्मचारियों का मुख्य तर्क यह है कि आईडीबीआई बैंक वर्तमान में पूरी तरह से मुनाफे में चल रहा है, ऐसे में एक फायदे में चल रहे सरकारी बैंक का निजीकरण करने का कोई भी तार्किक औचित्य समझ से परे है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांग— सरकार और एलआईसी की संयुक्त हिस्सेदारी रहे कम से कम 51 प्रतिशत, रोजगार और आरक्षण को मिले कानूनी सुरक्षा
सड़कों पर उतरे कर्मचारियों की मुख्य और सबसे बड़ी मांग यह है कि केंद्र सरकार और एलआईसी की संयुक्त हिस्सेदारी को किसी भी स्थिति में 51 प्रतिशत से कम नहीं होने दिया जाए और इसे बरकरार रखा जाए। इसके अलावा, बैंककर्मियों के रोजगार की सुरक्षा, उनके वेतनमान, पेंशन, ग्रेच्युटी तथा आरक्षण के नियमों को पुख्ता कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। कर्मचारियों का दो टूक कहना है कि जब तक निजीकरण की इस पूरी प्रक्रिया पर पूर्ण रोक नहीं लगाई जाती, उनका यह विरोध अभियान जारी रहेगा।
जमशेदपुर और बोकारो के बाद रांची में भी व्यापक हुआ विरोध, राज्यभर में कर्मचारियों का मिल रहा है पुरजोर समर्थन
उल्लेखनीय है कि इससे पहले ‘युनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज’ के आह्वान पर जमशेदपुर में दो और तीन नवंबर को विभिन्न विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। वहीं दूसरी ओर, बोकारो के बेरमो में भी बीमा कर्मचारी संघ ने एलआईसी शाखा के बाहर द्वार सभा कर आईडीबीआई बैंक कर्मचारियों की इस दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का खुलकर समर्थन किया था। अब रांची में भी बैंककर्मियों के धरने पर बैठने से यह साफ हो गया है कि निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का यह विरोध अब पूरे झारखंड राज्य में तेजी से व्यापक रूप लेता जा रहा है।
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