रांची: झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव संपन्न होने के बाद भ्रष्टाचार का मुद्दा फिर से केंद्र में आ गया है। सत्ताधारी महागठबंधन और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक-दूसरे पर हमलावर हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। दोनों दल जनता के बीच अपनी छवि को लेकर एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
📉 ‘भ्रष्टाचार चरम पर’, भाजपा ने सरकार को घेरा
भाजपा प्रवक्ता दीनदयाल वर्णवाल ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान सरकार पूरी तरह से अपने ट्रैक से भटक चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं और भ्रष्टाचार ने हर स्तर पर अपनी जड़ें जमा ली हैं। वर्णवाल ने ‘मइंया योजना’ का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं को समय पर लाभ नहीं मिल रहा है और योजना के क्रियान्वयन में भारी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार का प्रशासनिक कामकाज केवल एक दिखावा मात्र है।
🛡️ कांग्रेस का पलटवार: ‘हमारा रुख जीरो टॉलरेंस का’
भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस मीडिया संयोजक किशोरनाथ शाहदेव ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले दल खुद ‘भ्रष्टाचार की जननी’ रहे हैं और पूर्व की सरकारों में इनका ट्रैक रिकॉर्ड जगजाहिर है। शाहदेव ने दावा किया कि महागठबंधन सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलते ही सरकार स्वतः संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर रही है और उन्हें जेल भेजने से पीछे नहीं हट रही है।
🗳️ जनता के बीच छवि बनाने की जद्दोजहद
राज्यसभा चुनाव के बाद यह राजनीतिक टकराव इस बात का संकेत है कि दोनों ही दल भ्रष्टाचार के मुद्दे को अपनी ढाल और हथियार के रूप में उपयोग कर रहे हैं। भाजपा जहाँ सरकार की विफलताओं को उजागर कर एंटी-इंकम्बेंसी पैदा करना चाहती है, वहीं कांग्रेस और गठबंधन सरकार अपनी ‘पारदर्शी कार्यप्रणाली’ का हवाला देकर जनता के बीच भरोसा कायम रखने का प्रयास कर रही है।
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