मुंबई: महाराष्ट्र में आदिवासी विद्यार्थियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आज (रविवार, 25 अक्टूबर 2026) को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में ‘आदिवासी GenZ जनआक्रोश मोर्चा’ निकाला जा रहा है। छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि प्रशासन से आधिकारिक अनुमति न मिलने के बावजूद वे इस मार्च को आयोजित करने और अपनी आवाज बुलंद करने पर पूरी तरह अड़े हुए हैं। आंदोलनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि नासिक में लगातार 42 दिनों तक धरना देने, 13 दिनों तक क्रमिक भूख हड़ताल करने और 7 दिनों तक लॉन्ग मार्च निकालने के बावजूद उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हुई हैं और राज्य सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। इसी उपेक्षा के चलते आज विद्यार्थियों ने मुंबई पहुंचकर यह विशाल मार्च निकालने का फैसला किया है। इस प्रदर्शन के दौरान आदिवासी विद्यार्थी मुख्य रूप से आदिवासी विकास विभाग के मंत्री डॉ. अशोक उईके, विभाग के आयुक्त और सचिव के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, सरकारी आश्रमशालाओं (आवासीय स्कूलों) तथा छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव दूर करने, वहां हुई छात्रों की संदिग्ध मौतों की उच्चस्तरीय जांच कराने और रुकी हुई छात्रवृत्ति समय पर वितरित करने की मांग भी शामिल है। छात्र कुल 584 विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न गंभीर समस्याओं पर तत्काल ठोस निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। यह जन आक्रोश मोर्चा अचानक नहीं उठाया गया कदम है, बल्कि इसके पहले छात्रों ने नासिक में लंबा धरना और पैदल मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए 25 अक्टूबर तक का समय दिया था। पूर्व में आजाद मैदान पर अनुमति न मिलने और पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद, विद्यार्थियों ने रविवार सुबह 11 बजे दादर के शिवाजी पार्क में जुटने का नया आह्वान किया है। इस हाई-प्रोफाइल आंदोलन को देखते हुए मुंबई पुलिस और स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रख रहे हैं। छात्रों ने पहले ही चेतावनी दी है कि उनकी आवाज दबाने के किसी भी प्रयास के बावजूद वे पीछे नहीं हटेंगे। स्थिति को नियंत्रित रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।नासिक में लंबे संघर्ष के बाद मुंबई में आंदोलन का ऐलान
आदिवासी विकास मंत्री और अधिकारियों के इस्तीफे की मांग
सरकार को दिया गया था 25 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
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मुंबई: महाराष्ट्र में आदिवासी विद्यार्थियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर आज (रविवार, 25 अक्टूबर 2026) को मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में ‘आदिवासी GenZ जनआक्रोश मोर्चा’ निकाला जा रहा है। छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि प्रशासन से आधिकारिक अनुमति न मिलने के बावजूद वे इस मार्च को आयोजित करने और अपनी आवाज बुलंद करने पर पूरी तरह अड़े हुए हैं।
नासिक में लंबे संघर्ष के बाद मुंबई में आंदोलन का ऐलान
आंदोलनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि नासिक में लगातार 42 दिनों तक धरना देने, 13 दिनों तक क्रमिक भूख हड़ताल करने और 7 दिनों तक लॉन्ग मार्च निकालने के बावजूद उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं हुई हैं और राज्य सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। इसी उपेक्षा के चलते आज विद्यार्थियों ने मुंबई पहुंचकर यह विशाल मार्च निकालने का फैसला किया है।
आदिवासी विकास मंत्री और अधिकारियों के इस्तीफे की मांग
इस प्रदर्शन के दौरान आदिवासी विद्यार्थी मुख्य रूप से आदिवासी विकास विभाग के मंत्री डॉ. अशोक उईके, विभाग के आयुक्त और सचिव के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, सरकारी आश्रमशालाओं (आवासीय स्कूलों) तथा छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव दूर करने, वहां हुई छात्रों की संदिग्ध मौतों की उच्चस्तरीय जांच कराने और रुकी हुई छात्रवृत्ति समय पर वितरित करने की मांग भी शामिल है। छात्र कुल 584 विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न गंभीर समस्याओं पर तत्काल ठोस निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।
सरकार को दिया गया था 25 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम
यह जन आक्रोश मोर्चा अचानक नहीं उठाया गया कदम है, बल्कि इसके पहले छात्रों ने नासिक में लंबा धरना और पैदल मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए 25 अक्टूबर तक का समय दिया था। पूर्व में आजाद मैदान पर अनुमति न मिलने और पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद, विद्यार्थियों ने रविवार सुबह 11 बजे दादर के शिवाजी पार्क में जुटने का नया आह्वान किया है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
इस हाई-प्रोफाइल आंदोलन को देखते हुए मुंबई पुलिस और स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रख रहे हैं। छात्रों ने पहले ही चेतावनी दी है कि उनकी आवाज दबाने के किसी भी प्रयास के बावजूद वे पीछे नहीं हटेंगे। स्थिति को नियंत्रित रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।


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