अयोध्या: राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए दान में कथित वित्तीय हेराफेरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मंगलवार को अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है। हालांकि, जांच की गोपनीयता बनाए रखते हुए SIT ने विवरण साझा नहीं किया है।
💰 कैसल ग्रुप ने उठाए सवाल
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब कैसल ग्रुप ऑफ कंपनीज के एमडी डॉ. राजू वी. मनवानी ने सार्वजनिक रूप से चांदी की 200 ईंटों के दान का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि 26 जनवरी 2021 को उन्होंने सिंधी समुदाय की ओर से ये ईंटें चंपत राय को सौंपी थीं, लेकिन आज तक उन्हें दान की कोई रसीद नहीं दी गई। मनवानी का कहना है कि दान के समय करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये मूल्य की यह चांदी आज 6 से 7 करोड़ रुपये की हो गई है, और उन्हें यह जानने का हक है कि इसका इस्तेमाल कहां हुआ।
⚖️ SIT की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद 3 सदस्यीय SIT का गठन किया गया था। SIT के अध्यक्ष और लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने पुष्टि की है कि जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को दे दी गई है। अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।
📢 दानदाताओं का अधिकार
एमडी मनवानी ने स्पष्ट कहा कि हर दानदाता को यह पूछने का अधिकार है कि उनके चंदे का उपयोग कैसे किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों को सजा मिलेगी, ताकि भविष्य में दानदाताओं का भरोसा बना रहे। यह मामला अब केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर प्रशासन की जवाबदेही का भी बन गया है।
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