अयोध्या (उत्तर प्रदेश): अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान-चढ़ावे की कथित चोरी व हेराफेरी की जांच के बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन देर रात स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या शाखा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बैंक के अति-सुरक्षित लॉकर में रखे सोने, चांदी, कीमती आभूषणों समेत अन्य बहुमूल्य वस्तुओं और उनसे संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की सूक्ष्म समीक्षा की।
📸 लॉकर में जमा सोने-चांदी की ली गईं तस्वीरें, सीए (CA) की मौजूदगी में तैयार हुई अंतिम सूची
मंदिर से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस दौरान ट्रस्ट के आधिकारिक फोटोग्राफर भी महासचिव के साथ उपस्थित थे।
बताया जा रहा है कि अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन सोमवार शाम एसबीआई शाखा पहुंचे और देर रात तक वहीं रुककर पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया। इस दौरान बैंक लॉकर में जमा सोने-चांदी व अन्य कीमती धातुओं की एक-एक वस्तु की गुणवत्ता व मात्रा का मिलान कर विस्तृत सूची तैयार की गई और उनकी तस्वीरें ली गईं। वे पिछले तीन दिनों से ट्रस्ट के खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रहे थे। इस ऑडिट प्रक्रिया में ट्रस्ट के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) चंदन राय और जगदीश अफले भी मौजूद रहे।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश पर बनी नई एसआईटी (SIT), आज से नए सिरे से शुरू करेगी विस्तृत जांच
निरीक्षण के उपरांत मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. कृष्ण मोहन ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद गठित नई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मंगलवार से अपना जांच कार्य पुनः शुरू कर सकती है।
हालांकि, उन्होंने बैंक दौरे से जुड़े मीडिया के व्यक्तिगत सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया। राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन और व्यवस्थाओं के संबंध में उन्होंने कहा, “आप सभी आएं, दर्शन करें और स्वयं देखें। यदि कोई कमी नजर आए, तो हमें अवश्य बताएं।” नई एसआईटी दान में मिले आभूषणों के रखरखाव और रिकॉर्ड में आई कमियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए जांच का दायरा बढ़ाएगी, जिसमें फोरेंसिक विशेषज्ञों (Forensic Experts) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
⛓️ जून में उजागर हुआ था करोड़ों के दान में हेराफेरी का मामला, अब तक 8 आरोपी किए जा चुके हैं गिरफ्तार
उल्लेखनीय है कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए पवित्र दान में कथित हेराफेरी का मामला जून के प्रथम सप्ताह में उजागर हुआ था।
इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आरोपों की प्राथमिक पड़ताल हेतु 13 जून को एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। एसआईटी द्वारा 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद 25 जून को औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। इस प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 8 आरोपियों—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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