मुंबई (अनिल बेदाग)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तेजी से बदलती तकनीकों के इस आधुनिक युग में करियर की परिभाषा लगातार बदल रही है। ऐसे समय में उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल छात्रों को नौकरी के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे कौशल (स्किल्स) देना है जो उन्हें जीवन भर बदलती परिस्थितियों में सफल बनाए रखें। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए डब्लूपीयू (WPU) गोवा ने अपने ‘ट्रांसडिसिप्लिनरी’ शिक्षा मॉडल के माध्यम से भविष्य की शिक्षा का एक नया और स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
💡 ‘ओपन हाउस’ में ट्रांसडिसिप्लिनरी शिक्षा मॉडल पर जोर
हाल ही में मुंबई में आयोजित एक विशेष ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाला समय केवल किसी एक विषय के विशेषज्ञों का नहीं होगा। भविष्य उन लोगों का होगा जो विभिन्न क्षेत्रों की समझ को एक साथ जोड़कर नई और जटिल चुनौतियों का प्रभावी समाधान निकाल सकें।
🎓 ‘डिग्री नहीं, बल्कि जीवन भर सीखने की क्षमता है जरूरी’
डब्लूपीयू गोवा के वाइस चांसलर प्रोफेसर वाल्टर लील ने शिक्षा के असली मायने समझाते हुए कहा, “हम छात्रों को केवल डिग्री नहीं, बल्कि जीवन भर सीखने, नेतृत्व करने और हर परिस्थिति में खुद को ढालने की क्षमता देना चाहते हैं।” वहीं, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आशीष भारद्वाज का भी मानना है कि, “भविष्य उन लोगों का है जो लगातार नया सीख सकते हैं, नए विचारों को जोड़ सकते हैं और पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर सोच सकते हैं।”
🌐 तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ जिज्ञासा भी है महत्वपूर्ण
इस चर्चा में यह पूरी तरह से स्पष्ट हुआ कि जिज्ञासा, अनुकूलन क्षमता (Adaptability) और आजीवन सीखने की प्रवृत्ति अब तकनीकी ज्ञान जितनी ही महत्वपूर्ण बन चुकी है। डब्लूपीयू गोवा का स्पष्ट मानना है कि उच्च शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य छात्रों को केवल आज की जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के उन अनंत अवसरों के लिए भी तैयार करना है जिनकी कल्पना शायद आज संभव नहीं है।
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