खंडवा। आगामी गणेशोत्सव एवं नवदुर्गा उत्सव के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियां स्थापित नहीं की जाएं, बल्कि जिले में केवल मिट्टी की प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियां ही स्थापित की जाएं। यह अपील सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उपस्थित मूर्ति निर्माताओं तथा धार्मिक पर्वों पर मूर्ति स्थापित करने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों से की। बैठक में खंडवा विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तन्वे, पंधाना विधायक श्रीमती छाया मोरे, खंडवा महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव, नगर निगम अध्यक्ष अनिल विश्वकर्मा, कलेक्टर ऋषव गुप्ता, पुलिस अधीक्षक अगम जैन, अपर कलेक्टर अरविंद चौहान एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तारणेकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी भी मौजूद थे।
🌍 ‘प्रदूषण और जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाते हैं रासायनिक रंग’
सांसद ने इस अवसर पर कहा कि गत वर्ष मिट्टी की मूर्तियों को स्थापित करने के लिए जो अभियान चलाया गया था, उसी क्रम में इस वर्ष भी सभी के सहयोग से केवल मिट्टी की मूर्तियां ही स्थापित करने का अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां विसर्जित करने से प्रदूषण बढ़ता है और इन मूर्तियों में प्रयुक्त होने वाले रासायनिक रंगों से जीव-जंतुओं को नुकसान होता है। महापौर श्रीमती यादव ने बैठक में कहा कि गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी नगर निगम मूर्ति विसर्जन के लिए बेहतर व्यवस्था करेगा। उन्होंने उपस्थित गणमान्य नागरिकों व मूर्ति निर्माताओं से कहा कि वे प्राकृतिक रंगों से बनी मिट्टी की मूर्तियों को ही प्राथमिकता दें।
🚫 NGT के नियमों का होगा पालन, PoP के विक्रय पर है प्रतिबंध
बैठक में तय किया गया कि मूर्ति विसर्जन व्यवस्था के लिए नगर निगम एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की एक समिति बनाकर नई रूपरेखा तय की जाएगी। कलेक्टर ने इस अवसर पर कहा कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के निर्माण एवं विक्रय पर प्रतिबंध के स्पष्ट आदेश लागू हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदर्श आदेशों का जिले में कड़ाई से पालन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मूर्ति विसर्जन के लिए इस वर्ष पहले से अधिक अतिरिक्त अस्थाई विसर्जन कुंड बनाए जाएंगे और उनकी गहराई भी अधिक रखी जाएगी।
🏺 मिट्टी की मूर्तियों के निर्माण को मिलेगा बढ़ावा, दिया जा रहा प्रशिक्षण
कलेक्टर ने इस अवसर पर बताया कि गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी मिट्टी की मूर्तियों के निर्माण के संबंध में ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार गत वर्ष पुरानी कृषि उपज मंडी में मिट्टी की मूर्तियों के विक्रय के लिए स्टॉल लगाए गए थे, उसी तर्ज पर इस वर्ष भी मिट्टी की मूर्तियों के निर्माण और विक्रय को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा।
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