मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में जन्म प्रमाणपत्रों से जुड़ी एक बड़ी गड़बड़ी को पकड़ा है। सरकार ने साल 2024 से 2026 के बीच जन्म प्रमाणपत्रों में नियमों के विपरीत किए गए 19,734 संशोधनों को रद्द करने का आदेश दिया है। सरकार ने साफ किया है कि जन्म प्रमाणपत्र पूरी तरह रद्द नहीं किए जाएंगे, बल्कि उनमें गलत तरीके से किए गए बदलावों को हटाकर ‘मूल रिकॉर्ड’ (Original Record) बहाल किया जाएगा।
📋 क्यों हुई यह कार्रवाई?
स्वास्थ्य सेवा आयुक्तालय, पुणे के अनुसार, इन प्रमाणपत्रों में पंजीकरण नियमों का पालन नहीं किया गया था:
16,528 मामले: इनमें कोई भी सहायक दस्तावेज (Document) जमा नहीं किया गया था।
3,206 मामले: इन मामलों में दस्तावेज अधूरे पाए गए। सरकार का कहना है कि ‘जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969’ की प्रक्रियाओं को दरकिनार कर ये संशोधन किए गए थे।
यह मामला भाजपा नेता किरीट सोमैया द्वारा उठाए गए सवालों के बाद सुर्खियों में आया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ऐसे अस्पतालों के नाम पर प्रमाणपत्र जारी किए गए जिनका अस्तित्व ही नहीं है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि इन फर्जी दस्तावेजों का उपयोग अवैध पहचान पत्र बनाने में किया जा सकता है।🔍 किरीट सोमैया के आरोपों के बाद जागा प्रशासन
👮 एसआईटी (SIT) की जांच और मेयर के दावे
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (SIT) इस पूरे फर्जीवाड़े की जांच कर रही है। बीएमसी के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारियों पर भी बिना सत्यापन के प्रमाणपत्रों को मंजूरी देने के आरोप हैं। इससे पहले मेयर रितु तावड़े ने बांग्लादेशी नागरिकों को 267 फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए जाने का गंभीर दावा किया था। सरकार ने सभी संबंधित मामलों की विस्तृत रिपोर्ट पुणे स्थित उप मुख्य रजिस्ट्रार को सौंपने का निर्देश दिया है।
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