महाराष्ट्र के पुणे जिले में जहरीली शराब कांड ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। पुणे के हडपसर, कालेपडल और पिंपरी-चिंचवड़ इलाकों में अब तक 15 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है, जबकि कई अन्य अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने पूरी जांच ‘सीआईडी’ (CID) को सौंप दी है।
🧪 जांच में हुआ खुलासा: मेथनॉल का घातक खेल
शुरुआती जांच में यह पुष्टि हुई है कि शराब में अधिक नशा और मात्रा बढ़ाने के लिए ‘मेथनॉल’ का जानलेवा मिश्रण किया गया था। यह पूरा अवैध नेटवर्क पुणे शहर, ग्रामीण और पिंपरी-चिंचवड़ तक फैला हुआ था। पुलिस के अनुसार, उरली कांचन गांव निवासी राधेश्याम प्रजापति अवैध शराब तैयार करता था, जिसे योगेश वानखेड़े के माध्यम से विभिन्न अड्डों तक सप्लाई किया जाता था। योगेश वानखेड़े एक पेशेवर तस्कर है, जिसके खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं।
👮 लापरवाही पर पुलिस प्रशासन सख्त: अधिकारियों पर कार्रवाई
इस त्रासदी के बाद पिंपरी-चिंचवड़ के पुलिस आयुक्त विनय कुमार चौबे ने सख्त रुख अपनाते हुए दापोडी पुलिस थाने के निरीक्षक विजय वाघमारे और जांच टीम के चार अन्य कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अतिरिक्त, अपराध शाखा के निरीक्षक नरेंद्र ठाकरे का तबादला कर उन्हें कंट्रोल रूम भेज दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्तव्य में कोताही बरतने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
🔍 जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस और राज्य उत्पादन शुल्क विभाग की संयुक्त कार्रवाई जारी है। प्रशासन अब पूरे मेथनॉल सप्लाई चेन और इस अपराध से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गया है। स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ कठोरतम सजा की मांग की जा रही है। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि आने वाले दिनों में इस अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े चेहरे सामने आ सकते हैं।
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