बिलासपुर। अखिल भारतीय कांगे्रेस कमेटी विधि विभाग के अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने शनिवार को विधि विभाग के पदाधिकारियाें की वर्चुअल बैठक ली। इस दौरान कोरोना संक्रमण से राज्य के वकीलों की स्थिति को लेकर प्रदेश अध्यक्ष संदीप दुबे से जानकारी मांगी।
संदीप दुबे ने वकीलों के लिए दो प्रमुख मांग रखी। वकीलों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिलाने और अधिवकता सुरक्षा कानून को प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू कराने की मांग की। इस पर राज्यसभा सदस्य ने मुख्यमंत्री से चर्चा करने का आश्वासन दिया। अधिवक्ता स्वास्थ्य बीमा को गंभीरता के साथ लागू करने की बात भी उन्होंने कही।
अखिल भरतीय कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा प्रतिदिन पूरे देश के अलग-अलग राज्यों के कांग्रेस विधि के अध्यक्षाें की बैठक ले रहे हैं। इसी कड़ी में कोविड 19 से लड़ने में सरकार और पार्टी की भूमिका के विषय पर गंभीर चर्चा कर अधिवक्ताओं की भूमिका और साथ ही साथ इस संकट में अधिवक्ताओं की स्वास्थ्य की जानकारी लेने शनिवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के अध्यक्ष संदीप दुबे के साथ वर्चुअल मीटिंग की।
विधि विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधि विभाग के कार्यो की जानकारी ली और कांग्रेस विधि के कार्यो की सराहना की है। संदीप दुबे ने बताया कोरोना संक्रमण को संभालने में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूरी ताकत झोंककर राज्य को इस संकट से उबारने में महती भूमिका निभाई है। उन्होंने नजदीक से मानिटरिंग की। सीधे डाक्टर, नर्स ,मितानिन, पार्टी कार्यकर्ताओं से मीटिंग कर स्थिति को संभाला है।
स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने भी कड़ी मेहनत की है। साथ ही साथ वैक्सीनेशन को बहुत तेजी से आगे बढ़ाया है। राज्यसभा सदस्य तन्खा ने वकीलों का हाल जाना। संदीप दुबे ने बताया कि राज्य में 70 से अधिक अधिवक्ताओं को हमने खोया है। कोरोना के कारण उनका मृत्यु दावा रुका हुआ है। जिस संबंध में हमने बार कौंसिल आफ इंडिया और स्टेट बार कौंसिल को शीघ्र मृत्यु दावा देने को पत्र लिखा है।
वकीलों को आर्थिक मदद का उठाया मुद्दा
बैठक के दौरान संदीप दुबे ने राज्यसभा सदस्य तन्खा के सामने प्रदेश के वकीलों का मुद्दा उठाया। वकीलों को पांच लाख स्र्पये तक स्वास्थ्य बीमा कराने की मांग की। इसमंे बार कौंसिल आफ इंडिया, स्टेट बार कौंसिल, राज्य सरकार और वकीलों की बराबर की सहभागिता पर बल दिया। अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम को प्रभावी ढंग से राज्य में लागू कराने की मांग रखी।
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