खंडवा। प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी बुद्ध जयंती का पर्व धार्मिक उत्साह के साथ नगर में मनाया गया। सिंगाड़ तलाई स्थित पंचशील नगर एवं सूरजकुंड रेलवे कॉलोनी में बुद्ध मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर दर्शन-पूजन कर नमन किया।
✨ शांति, करुणा और प्रज्ञा का संदेश देता है यह पावन पर्व
बुद्ध जयंती (बुद्ध पूर्णिमा) बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (निर्वाण) और महापरिनिर्वाण (मृत्यु) की त्रिविध याद में मनाया जाने वाला सबसे पवित्र त्योहार है। वैशाख पूर्णिमा को मनाई जाने वाली यह जयंती शांति, करुणा और प्रज्ञा के संदेश के साथ विश्वभर में, विशेषकर एशिया में हर्षोल्लास से मनाई जाती है।
🕊️ वैशाख पूर्णिमा का विशेष संयोग और अंतरराष्ट्रीय मान्यता
बुद्ध जयंती का यह पावन संयोग अद्वितीय है क्योंकि बुद्ध का जन्म, ज्ञानोदय (बोधगया में) और महापरिनिर्वाण (कुशीनगर में) तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन हुए। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की पूर्णिमा को यह बुद्ध जयंती 1 मई को मनाई गई। 1999 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी, जो बौद्ध धर्म के मानवता में योगदान को स्वीकार करता है।
🙏 बुद्ध विहार में गूंजी बुद्ध वंदना, हुआ भोजन प्रसादी का आयोजन
पंचशील नगर सिंगाड़ तलाई बुद्ध विहार में सभी वार्ड वासियों ने मंदिर में पहुंचकर दर्शन कर बुद्ध वंदना की। दिन भर मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना की गई। पंचशील नगर में रात्रि में ‘बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया’ द्वारा दर्शन-पूजन पश्चात भोजन प्रसादी का आयोजन हुआ।
👥 बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में संपन्न हुआ कार्यक्रम
क्षेत्र के जितेंद्र बोधड़े, कमल तायडे, सतीश इंगले, पन्ना लाल नीलकंठ, संजय मेढेकर, सोनू लहसे एवं समस्त महिला मंडल व सदस्यों की उपस्थिति में ‘बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया’ के तत्वावधान में यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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