देवघर: श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खरीदी गई ‘बाइक एम्बुलेंस’ आज सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़ गई हैं। जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में खड़ी ये एम्बुलेंस पिछले लंबे समय से धूल फांक रही हैं। लाखों रुपये की सरकारी संपत्ति देखरेख के अभाव में अब धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो रही है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे प्रशासनिक दावों की पोल खुल गई है।
📉 देखरेख के अभाव में बदहाल स्थिति
ईटीवी भारत की टीम द्वारा किए गए जायजे में पाया गया कि अधिकांश बाइक एम्बुलेंस लंबे समय से उपयोग में नहीं लाई गई हैं। इनके पार्ट्स खराब हो चुके हैं, स्ट्रेचर पर गंदगी जमी है और टायर तक जमीन में धंस गए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि विभाग की मंशा सही होती, तो इन एम्बुलेंस का उपयोग केवल मेले तक सीमित न रखकर दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए सामान्य दिनों में भी किया जा सकता था।
🗣️ अधिकारियों का स्पष्टीकरण और विधायक की चिंता
जब इस मामले पर जसीडीह सीएचसी प्रभारी डॉ. विश्वनाथ चौधरी से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि आम दिनों में इनके उपयोग का कोई आदेश प्राप्त नहीं है। वहीं सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने अनभिज्ञता जताई है। इसके विपरीत, स्थानीय विधायक सुरेश पासवान ने इसे सरकारी संपत्ति की बर्बादी बताते हुए चिंता जताई है और इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया है।
❓ स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर खड़े हुए सवाल
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्या कारण है कि एक अत्यंत उपयोगी सरकारी संसाधन को साल के 365 दिन कबाड़ में खपाया जा रहा है? हर वर्ष मेले से पहले इनकी मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च कर मोटे बिल बनाए जाते हैं, लेकिन पूरे वर्ष इनकी देखरेख का कोई ठोस तंत्र नहीं है। आखिर कब तक जनता के पैसे से खरीदी गई ये एम्बुलेंस अस्पताल परिसर में इसी तरह सड़ती रहेंगी?
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