रांची: झारखंड के प्रमुख चिकित्सा संस्थान, राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) को नया नेतृत्व मिल गया है। डॉ. डी.के. सिन्हा को संस्थान का नया निदेशक नियुक्त किया गया है। रिम्स के 1978 MBBS बैच के छात्र रहे डॉ. सिन्हा इससे पहले एकेडमिक डीन के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। डॉ. सिन्हा की नियुक्ति से संस्थान में सकारात्मक बदलावों की उम्मीद जगी है।
📋 रिम्स को ‘पटरी पर लाना’ पहली प्राथमिकता
ईटीवी भारत के साथ खास बातचीत में डॉ. सिन्हा ने स्पष्ट किया कि रिम्स पर पूरे राज्य की बीमार आबादी की जिम्मेदारी है, इसलिए इसे हर हाल में बेहतर स्थिति में रखना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने माना कि गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को उम्मीद के अनुरूप इलाज मिले, इसके लिए पूरी जवाबदेही के साथ काम करने की आवश्यकता है।
👨🏫 फैकल्टी की कमी और शैक्षणिक सुधार
डॉ. सिन्हा ने कहा कि मरीजों के इलाज के साथ-साथ संस्थान में गुणवत्तापूर्ण मेडिकल पढ़ाई सुनिश्चित करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए एकेडमिक माहौल को बेहतर बनाने और फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए वे विशेष कार्ययोजना पर काम करेंगे। उन्होंने अगले 10 से 20 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
💊 “दवाएं बाहर से खरीदना हमारी नाकामी”
नए निदेशक ने बेबाकी से स्वीकार किया कि मरीजों को बाहर से दवा या सिरिंज खरीदने के लिए कहना संस्थान की नाकामी है। उन्होंने राज्य की जनता को भरोसा दिलाया कि अब रिम्स में सभी जरूरी दवाइयां सीधे अस्पताल से ही उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने फर्श पर इलाज की मजबूरी को खत्म करने के लिए विभागों के बीच बेहतर बेड मैनेजमेंट की रणनीति बनाने की बात कही है।
🚀 पुरानी गरिमा और ऊंचाइयों का लक्ष्य
डॉ. सिन्हा का कहना है कि रिम्स रिसर्च के क्षेत्र में पहले से ही अच्छा कार्य कर रहा है, जिसे वे और अधिक ऊंचाई तक ले जाना चाहते हैं। उनका लक्ष्य रिम्स की पुरानी गरिमा को वापस लौटाना और इसे राज्य का सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य संस्थान बनाना है।
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