दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में जुलाई महीने के दौरान सीजेपी (CJP) प्रदर्शन और संसद मार्च के समय हुई हिंसा की जांच अब आधिकारिक तौर पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने हिंसा से जुड़े मामलों में भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिए हैं। इस पूरी जांच का मुख्य फोकस 20 जुलाई को नई दिल्ली में हुए हिंसक घटनाक्रम के दौरान जिम्मेदार और उपद्रवी तत्वों की भूमिका तय करना होगा। पुलिस यह भी गहराई से पता लगाएगी कि यह हिंसा पूरी तरह से सुनियोजित (Pre-planned) थी या फिर प्रदर्शन के दौरान कुछ आपराधिक तत्व इसमें शामिल हो गए थे।
🏛️ संसद मार्च के दौरान हुआ था टकराव, अब सभी मामलों की होगी संयुक्त जांच
बीती 20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च के दौरान दिल्ली के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस बल के बीच तीखा टकराव देखने को मिला था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, इस उग्र प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर पथराव, तोड़फोड़ और सरकारी व सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई थीं।
शुरुआती कार्रवाई के तहत दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग थानों में कई एफआईआर (FIR) दर्ज की थीं। 22 जुलाई तक पुलिस ने 20 और 21 जुलाई की घटनाओं को लेकर कुल 10 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी दी थी। अब क्राइम ब्रांच इन सभी बिखरे हुए घटनाक्रमों और मामलों को एक साथ जोड़कर उनकी कड़ियों को सुलझाने का प्रयास करेगी।
🔍 जांच के प्रमुख बिंदु: सुनियोजित साजिश से लेकर पुलिसकर्मियों पर हमले तक
क्राइम ब्रांच की इस विस्तृत जांच में निम्नलिखित मुख्य पहलुओं को शामिल किया गया है:
सुनियोजित हिंसा की जांच: पुलिस यह पता लगाएगी कि 20 जुलाई की हिंसा अचानक भड़की थी या इसके पीछे कोई पूर्व नियोजित साजिश थी। इसके लिए प्रदर्शन से पहले की गतिविधियों और संदिग्धों की कॉल डिटेल व मूवमेंट की जांच की जाएगी।
पुलिसकर्मियों पर हमला: इस प्रदर्शन के दौरान भारी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे। रिपोर्ट के अनुसार, 118 से अधिक पुलिसकर्मी और लगभग 60 प्रदर्शनकारी जख्मी हुए थे। क्राइम ब्रांच उन लोगों की पहचान करेगी जिन्होंने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया था।
सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान: पुलिस वाहनों और अन्य सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई और अपराधियों की पहचान के लिए सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और वीडियो साक्ष्यों का सहारा लिया जा रहा है।
इस विवाद से जुड़े मामले बाद में देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) तक भी पहुंचे थे। गत अगस्त माह में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया था कि वह सीजेपी के 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़ी 13 एफआईआर को आगे नहीं चलाना चाहती है, और इसके साथ ही नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति भी मांगी थी। इसके अलावा, 20 जुलाई की हिंसा के दौरान आरएएफ (RAF) जवानों पर कथित हमले और एक युवक को पैलेट लगने के मामलों में भी अलग से एफआईआर दर्ज की गई थी। अब क्राइम ब्रांच इन सभी साक्ष्यों के आधार पर अपनी आगे की कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाएगी।⚖️ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
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