नई दिल्ली: देश में दूध की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं के लिए एक बार फिर चिंता की खबर है। डेयरी उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य नहीं रहा और अल-नीनो के कारण चारे की कमी हुई, तो आने वाले जुलाई-अगस्त महीनों में दूध की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कीमतों में 3 से 4 फीसदी तक का इजाफा देखा जा सकता है।
📉 अल-नीनो और दूध उत्पादन का सीधा संबंध
डेयरी इंडस्ट्री के अनुसार, कम बारिश का सीधा असर किसानों द्वारा पाले जाने वाले मवेशियों की संख्या पर पड़ता है। चारे और पानी की कमी के चलते दूध का उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है और कीमतें ऊपर चढ़ जाती हैं। पराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन देवेंद्र शाह ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रमुख दूध उत्पादक क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रहती है, तो 3-4 फीसदी की बढ़ोतरी तय है।
🛡️ राज्य सरकारों और कंपनियों की क्या है तैयारी?
इस संभावित संकट को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार और अन्य डेयरी कंपनियां सतर्क हो गई हैं:
महाराष्ट्र सरकार: पशुपालन विभाग ने किसानों को अभी से चारे की फसल की योजना बनाने और मवेशियों के संरक्षण के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है।
डेयरी कंपनियों का रुख: ‘अमूल’ के एमडी जयेन मेहता ने कहा कि वे मानसून की प्रगति पर नजर रखे हुए हैं और फिलहाल कोई तत्काल संकट नहीं है। वहीं ‘मदर डेयरी’ ने भी राज्य-दर-राज्य अपने खरीद नेटवर्क की बारीकी से मॉनिटरिंग शुरू कर दी है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए।
हालाँकि डेयरी क्षेत्र के बड़े खिलाड़ियों का मानना है कि कम बारिश का असर पूरे देश के बजाय कुछ विशेष क्षेत्रों तक ही सीमित रह सकता है, फिर भी उपभोक्ता आने वाले महीनों में दूध के महंगे होने की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं कर रहे हैं। मानसून की आगामी चाल ही तय करेगी कि आम लोगों की रसोई का बजट कितना प्रभावित होगा।🔍 भविष्य की स्थिति
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