उज्जैन: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में सड़क हादसों में होने वाली मृत्यु दर को कम करने के लिए यातायात पुलिस ने ‘जीवन रक्षक’ अभियान का शंखनाद किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना के ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के तुरंत बाद का समय) में घायल को सही उपचार दिलाकर उसकी जान बचाना है। इसके लिए पुलिस ने न केवल बड़े इनाम की घोषणा की है, बल्कि आम नागरिकों को प्रशिक्षित करने का जिम्मा भी उठाया है।
मददगारों के लिए ₹25,000 का नकद इनाम
मुख्यमंत्री राहगीर योजना के तहत उज्जैन पुलिस ने घोषणा की है कि यदि कोई व्यक्ति सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुँचाता है और उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाता है, तो उसे ₹25,000 तक का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
कानूनी पचड़ों से मुक्ति का भरोसा
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घायल की मदद करने वाले व्यक्ति (Good Samaritan) से अस्पताल या थाने में कोई अनावश्यक पूछताछ नहीं की जाएगी। उन्हें किसी भी कानूनी परेशानी में नहीं डाला जाएगा, ताकि लोग बिना किसी डर के दूसरों की मदद के लिए आगे आ सकें।
20 ‘ब्लैक स्पॉट’ पर विशेष फोकस और ट्रेनिंग
यातायात पुलिस ने जिले के उन 20 स्थानों को चिन्हित किया है जहाँ सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं। इन ‘ब्लैक स्पॉट’ के पास रहने वाले स्थानीय लोगों, दुकानदारों और राहगीरों को सशक्त बनाया जा रहा है:
डॉक्टरों की टीम: विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें स्थानीय लोगों को सीपआर (CPR) और फर्स्ट एड का प्रशिक्षण दे रही हैं।
फर्स्ट एड किट: ट्रेनिंग के साथ-साथ लोगों को मुफ्त फर्स्ट एड किट भी बांटी जा रही हैं ताकि एम्बुलेंस आने से पहले घायल को प्राथमिक उपचार मिल सके।
अक्सर देखा जाता है कि लोग कानूनी कार्यवाही के डर से घायल की मदद करने से कतराते हैं। उज्जैन पुलिस का यह ‘जीवन रक्षक’ अभियान न केवल उस डर को खत्म करेगा, बल्कि इनाम और सम्मान के जरिए समाज में परोपकार की भावना को भी बढ़ावा देगा।क्यों जरूरी है यह अभियान?
यह खबर आपको कैसी लगी?


मध्यप्रदेश


























