ओडिशा/नई दिल्ली: ओडिशा के एक आदिवासी व्यक्ति द्वारा अपनी मृत बहन की जमा पूंजी निकालने के लिए उसका कंकाल बैंक तक ले जाने की घटना ने देश की बैंकिंग प्रणाली की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया था। इस अमानवीय घटना का संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने अब बेहद कड़ा कदम उठाया है। संबंधित बैंक के ब्रांच मैनेजर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
📜 क्या था पूरा मामला?
यह मामला ओडिशा ग्रामीण बैंक (OGB) की मल्लिपोसी शाखा का है। मृत महिला खाताधारक ‘कालरा मुंडा’ के खाते में कोई नॉमिनी नहीं था। बैंक के कठोर नियमों और प्रक्रियात्मक देरी के चलते उसके भाई जीतू मुंडा को पैसे निकालने के लिए अत्यधिक प्रताड़ित किया गया, जिसके बाद उसे विवश होकर मृत बहन के अवशेष बैंक ले जाने पड़े। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा वित्त मंत्रालय को पत्र लिखे जाने के बाद, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस मामले की गहन जांच के आदेश दिए थे।
🏦 देशभर के 28 ग्रामीण बैंकों के लिए नया ‘सेंसिटिव बैंकिंग’ मॉडल
इस घटना को वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मंत्री पंकज चौधरी ने साफ किया कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन वह संवेदनशीलता और मानवीय सहानुभूति के बिना नहीं हो सकता। इसके चलते निम्नलिखित सुधार किए गए हैं:
मैनेजर पर कार्रवाई: मल्लिपोसी ब्रांच के मैनेजर को सस्पेंड कर दिया गया है।
देशव्यापी एडवाइजरी: देशभर के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्रामीण, आदिवासी और कमजोर वर्गों के ग्राहकों के साथ अत्यंत सहानुभूति और पारदर्शी सेवा सुनिश्चित करें।
खाता निपटान प्रक्रिया: भविष्य में ऐसी अमानवीय घटनाओं को रोकने के लिए क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रियाओं को सरल और मानवीय बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
ओडिशा ग्रामीण बैंक (OGB) ने अपने सभी फील्ड कर्मचारियों के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की है। अब बैंक अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि बैंकिंग प्रक्रियाओं को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर उन्हें ग्राहकों के प्रति सम्मानजनक और सुलभ बनाया जाए। यह सुधार विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए अनिवार्य हैं जहाँ साक्षरता दर कम है और बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच सीमित है।👥 बैंक प्रशासन की जिम्मेदारी
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