लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात अभी से बिछने लगी है। भाजपा की सहयोगी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने चुनावी मैदान में उतरते हुए 32 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। पार्टी का मुख्य फोकस समाजवादी पार्टी (SP) के गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ डिविजन पर है। SBSP के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने घोषणा की है कि वे खुद अतरौलिया विधानसभा सीट से चुनावी ताल ठोकेंगे।
⚔️ सपा के ‘MY’ समीकरण को चुनौती
पार्टी प्रमुख और प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर लगातार अखिलेश यादव पर हमलावर हैं। वे आजमगढ़ में सपा के ‘मुस्लिम-यादव’ (MY) सोशल गठबंधन को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजभर की यह रणनीति NDA के उस नैरेटिव को आगे बढ़ाने की है, जिसका मकसद सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव के प्रभाव को कम करना है।
📉 SBSP का चुनावी इतिहास और प्रभाव
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2022 का चुनाव: SBSP सपा के साथ गठबंधन में थी, 19 सीटों पर चुनाव लड़ा और 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी का दावा है कि सपा की उस जीत में ओम प्रकाश राजभर के वोट बैंक की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
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2017 का चुनाव: NDA के साथ रहते हुए पार्टी ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 सीटों पर जीत हासिल की थी। अरुण राजभर का कहना है कि अब पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा को “सबक सिखाया जाएगा” और उनकी पार्टी पूरी ताकत के साथ आजमगढ़ में सक्रिय है।
🤝 NDA के साथ समन्वय की प्रक्रिया
अरुण राजभर ने स्पष्ट किया है कि सीटों के बंटवारे को लेकर कोई भी अंतिम निर्णय NDA के शीर्ष नेतृत्व और SBSP नेतृत्व के बीच आपसी सहमति और सही समय पर लिया जाएगा। पार्टी का जोर इस बार पूर्वी यूपी में अपने आधार को और अधिक मजबूत करने पर है। ओम प्रकाश राजभर के इस आक्रामक रुख से यह साफ है कि 2027 का चुनाव आजमगढ़ और आसपास के इलाकों में बेहद रोचक होने वाला है।
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