महाराष्ट्र के अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण आंदोलन फिर से तेज हो गया है। आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने आज सुबह 10 बजे से अपना आमरण अनशन शुरू कर दिया है। भीषण गर्मी के बावजूद पाटिल अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। सरकार की ओर से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और अन्य प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की, लेकिन वार्ता का कोई ठोस समाधान न निकल पाने के कारण अनशन शुरू कर दिया गया है।
🚫 क्यों हो रहा है सरकार के खिलाफ विरोध?
मनोज जरांगे पाटिल ने साफ कर दिया है कि यदि अनशन के दौरान उनकी सेहत बिगड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार की होगी। आंदोलन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
प्रमाण पत्रों में गड़बड़ियां: फिर से जारी किए गए आरक्षण सर्टिफिकेट में खामियां और लंबित प्रमाण पत्रों को जारी करने में हो रही देरी।
संदीप शिंदे समिति का विस्तार: कुणबी रिकॉर्ड का पता लगाने के लिए गठित समिति को एक और साल का विस्तार देना।
आरक्षण की प्रक्रिया: आरक्षण प्रक्रिया में बरती जा रही कानूनी जटिलताएं और सुस्ती।
सरकार की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि मनोज जरांगे पाटिल की कुछ प्रमुख मांगों को लिखित रूप में स्वीकार किया जा सकता है। चर्चा है कि उन्हें जल्द ही सरकार की ओर से एक ड्राफ्ट सौंपा जा सकता है। वहीं, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल दोबारा उनसे मुलाकात कर अनशन को समाप्त कराने की कोशिश कर सकते हैं।📑 सरकार की ओर से समाधान की कोशिशें
⚖️ मंत्री विखे पाटिल का पक्ष
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण लागू करने के लिए समय-सीमा निर्धारित है और कार्य प्रगति पर है। मंत्री विखे पाटिल ने कहा कि कानूनी शर्तों और सत्यापन में समय लग रहा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सरकार निष्क्रिय है। फिलहाल, पूरे राज्य की नजरें अंतरवाली सराटी पर टिकी हैं कि क्या सरकार और आंदोलनकारी किसी समझौते पर पहुँच पाते हैं।
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