खंडवा। शहर में आयोजित जैनत्व बाल संस्कार शिक्षण शिविर के चौथे दिन धार्मिक, सांस्कृतिक और सेवा गतिविधियों का समन्वय देखने को मिला। प्रातः 6:45 बजे प्रभात फेरी के साथ दिन की शुरुआत हुई, जिसके बाद प्रातः 7:15 बजे बच्चों द्वारा श्रीजी का अभिषेक एवं देव-शास्त्र पूजन संपन्न हुआ। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि समाज के नन्हे बालकों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया।
📖 बच्चों को दी गई देव दर्शन और पूजा-अर्चना की शिक्षा
बाहर से पधारे विद्वान पंडितों द्वारा शिविर के माध्यम से धर्म की शिक्षा के साथ देव दर्शन, भगवान का अभिषेक और पूजा-अर्चना किस प्रकार की जाती है, यह सिखाया गया। बच्चे बड़े उत्साह के साथ भगवान का अभिषेक व पूजन-अर्चन कर रहे हैं। अच्छी शिक्षा के साथ बच्चों को धर्म की शिक्षा भी अच्छे संस्कारवान बनने के लिए जरूरी है, इसी उपदेश को लेकर मुमुक्षु मंडल द्वारा प्रतिवर्ष यह शिविर लगाया जाता है।
🦷 ‘चैतन्य’ के महत्व पर प्रवचन, लगा निःशुल्क दंत जांच शिविर
सुनील जैन ने बताया कि रविवार सुबह 9:00 बजे आरोन से पधारे पंडित अमन जी शास्त्री द्वारा प्रवचन दिया गया, जिसमें उन्होंने जीवन में संयम, साधना और चैतन्य के महत्व को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ धर्म और संस्कृति की शिक्षा की भी आवश्यकता है, जिसके माध्यम से बच्चे संस्कारवान बन सकते हैं। प्रवचन के पश्चात सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक पोरवाड़ परिवार के सहयोग से ‘संस्कार मल्टी स्पेशलिटी डेंटल क्लिनिक’ के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क दंत जांच शिविर आयोजित किया गया। शिविर में डॉ. प्रांजल जैन एवं डॉ. समीक्षा जैन द्वारा लगभग 80 बच्चों तथा 50 महिला-पुरुषों का निःशुल्क परीक्षण कर दांतों की देखभाल संबंधी आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
✨ संगीतमय विधान, भक्ति और ‘मैं हूं चैतन्य’ के संदेश से मिली प्रेरणा
समाज के सुनील जैन और प्रेमांशु जैन ने बताया कि दोपहर 2:00 से 4:00 बजे तक श्री बृहद् द्रव्य संग्रह मंडल विधान की पूजा पंडित अमन जी शास्त्री के निर्देशन में संगीतमय वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें पूजा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। शाम 7:15 बजे श्रीजी की आरती एवं भक्ति का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चे, महिलाएं और पुरुष सभी ने सहभागिता की। रात्रि 9:00 बजे बच्चों द्वारा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिनमें धार्मिक अंताक्षरी मुख्य आकर्षण रही। शिविर में पंडित रितेश शास्त्री, पंडित विद्या जैन एवं पंडित आर्जव द्वारा 5 से 15 वर्ष तक के बच्चों को विभिन्न वर्गों में धर्म शिक्षा प्रदान की जा रही है। शिविर के दौरान दिया गया संदेश ‘मैं हूं चैतन्य’ जीवन में आंतरिक शांति और आत्मबोध के महत्व को रेखांकित करता है, जिससे उपस्थितजनों को आध्यात्मिक प्रेरणा मिली।
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