किडनी हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने और तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। लेकिन जब किडनी में कैंसर विकसित होने लगता है, तो शुरुआती चरण में इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। यही वजह है कि कई मामलों में बीमारी का पता देर से चलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी कैंसर की शुरुआत हमेशा दर्द से नहीं होती, बल्कि शरीर कुछ ऐसे संकेत देता है जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। आइए जानते हैं किडनी कैंसर के 7 प्रमुख लक्षण और कब डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।
1. पेशाब में खून आना (Hematuria)
किडनी कैंसर का सबसे आम और महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत पेशाब में खून आना माना जाता है। अगर आपके पेशाब का रंग लाल, गुलाबी या भूरा दिखाई दे, या उसमें खून की बूंदें नजर आएं, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। हालांकि, पेशाब में खून आना केवल किडनी कैंसर का ही संकेत नहीं होता, बल्कि यह किडनी स्टोन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या अन्य किडनी संबंधी बीमारियों के कारण भी हो सकता है। इसलिए ऐसा कोई भी लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

2. बिना वजह तेजी से वजन घटना
यदि बिना डाइटिंग, एक्सरसाइज या किसी स्पष्ट कारण के आपका वजन लगातार कम हो रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह किडनी कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का संभावित संकेत हो सकता है। किडनी कैंसर में कैंसर कोशिकाएं शरीर की अधिक ऊर्जा और पोषक तत्वों का उपयोग करने लगती हैं, जिससे धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।
3. लगातार भूख कम लगना
अगर लगातार भूख कम लग रही है, खाने का मन नहीं करता या थोड़ी-सी मात्रा खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किडनी कैंसर सहित कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संभावित संकेत हो सकता है। किडनी में ट्यूमर होने पर शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है, जिससे भूख कम हो जाती है और इसके साथ वजन भी तेजी से घटने लगता है। यदि यह समस्या कई दिनों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
4. एनीमिया (खून की कमी)
किडनी शरीर में ‘एरिथ्रोपोइटिन’ (Erythropoietin) नामक हार्मोन बनाती है, जो लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किडनी कैंसर होने पर इस हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो सकता है। इसके कारण लगातार कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सांस फूलना और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यदि ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

5. कमर या पीठ के निचले हिस्से में गांठ या सूजन
यदि कमर के एक तरफ, पसलियों के नीचे या पीठ के निचले हिस्से में किसी तरह की गांठ, सूजन या असामान्य उभार महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। हालांकि ऐसा हर मामले में किडनी कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन यह किडनी में ट्यूमर या किसी अन्य गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है। यदि इसके साथ दर्द, पेशाब में खून या लगातार वजन कम होने जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो बिना देरी किए यूरोलॉजिस्ट या डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
6. लगातार थकान और कमजोरी
यदि पूरी नींद लेने और पर्याप्त आराम करने के बाद भी दिनभर थकान, कमजोरी या सुस्ती बनी रहती है, तो इसे सामान्य थकावट समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किडनी कैंसर सहित कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती संकेत हो सकता है। किडनी कैंसर में शरीर की ऊर्जा लगातार प्रभावित होती है और एनीमिया जैसी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं, जिससे व्यक्ति हर समय थका हुआ महसूस करता है। अगर यह समस्या कई दिनों या हफ्तों तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।
7. बार-बार या लगातार बुखार आना
अगर बिना किसी संक्रमण या सर्दी-जुकाम के बार-बार बुखार आता है या कई दिनों तक हल्का बुखार बना रहता है, खासकर रात के समय, तो इसकी जांच कराना जरूरी है। यह किडनी कैंसर का भी एक संभावित लक्षण हो सकता है।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी समस्या 2 से 3 सप्ताह या उससे अधिक समय तक बनी रहे, या पेशाब में खून दिखाई दे, तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट या जनरल फिजिशियन से संपर्क करें। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या अन्य जांच के जरिए सही कारण का पता लगा सकते हैं।
ध्यान देने वाली बातें
इन लक्षणों का होना हमेशा किडनी कैंसर का मतलब नहीं होता। ये किडनी स्टोन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) या अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकते हैं। इसलिए घबराने के बजाय समय पर डॉक्टर से जांच कराना सबसे सही कदम है। किडनी कैंसर का जितनी जल्दी पता चलता है, उसका इलाज उतना ही प्रभावी हो सकता है।
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