खंडवा: महाराष्ट्र के नासिक जिले से घर छोड़कर मध्य प्रदेश के खंडवा पहुंचे 17 वर्षीय एक किशोर को लेकर मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा एक भावुक घटनाक्रम सामने आया है। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने रेलवे स्टेशन पर अकेला पाकर किशोर को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और तत्काल बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया। समिति के निर्देश पर किशोर को अस्थायी रूप से अनुसूचित जनजाति सीनियर उत्कृष्ट छात्रावास में ठहराया गया था।
‘मां आज क्या बनाओगी… मैं घर आ रहा हूं’, अकेलापन बना वजह
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि किशोर लंबे समय से हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। माता-पिता से नियमित बातचीत न होने और पिता के काम में अत्यधिक व्यस्त रहने के कारण वह खुद को भावनात्मक रूप से काफी अकेला महसूस करने लगा था। इसी मानसिक तनाव और आवेश में आकर उसने घर छोड़ दिया था। घर से निकलते समय उसने अपनी मां को फोन कर केवल इतना कहा, “मां, आज क्या बनाओगे… मैं घर आ रहा हूं।” यह बात उसकी मानसिक स्थिति और परिवार के स्नेह की जरूरत को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
छात्रावास की दीवार फांदकर रात में फिर भागा, पुलिस ने रातों-रात खोज निकाला
बाल कल्याण समिति ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए किशोर की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। छात्रावास में उसकी सुरक्षा के लिए एक पुलिस आरक्षक (कॉन्स्टेबल) की ड्यूटी भी लगाई गई थी। हालांकि, देर रात किशोर चकमा देकर छात्रावास की बाउंड्री वॉल फांदकर निकल गया। जैसे ही इसके लापता होने की सूचना मिली, पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल नाकाबंदी कर तलाश शुरू कर दी। पुलिस की तत्परता से रात में ही उसे सुरक्षित ढूंढ निकाला गया, जिसके बाद सभी ने राहत की सांस ली।
कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर सुरक्षित माता-पिता को सौंपा गया
इसके बाद बाल कल्याण समिति ने नासिक में रह रहे किशोर के परिजनों से तत्काल संपर्क साधा। परिजनों के खंडवा पहुंचने पर उनकी पहचान और दस्तावेजों का गहन सत्यापन किया गया। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत सभी आवश्यक वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रविवार को किशोर को सुरक्षित उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
बेटे से दोबारा मिलते ही परिजन भावुक हो गए और उन्होंने आरपीएफ, खंडवा पुलिस तथा बाल कल्याण समिति का सहृदय आभार व्यक्त किया। इस पूरे मामले में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष के नेतृत्व में समिति सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, स्वप्निल जैन और कविता पटेल ने समन्वित व सराहनीय भूमिका निभाई।
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