मुंबई (अनिल बेदाग): भारतीय सिनेमा के इतिहास में बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं, जो मनोरंजन की सीमाओं को पार कर लोगों की भावनाओं और आस्था का अटूट हिस्सा बन जाती हैं। ‘कृष्णावतारम’ (Krishnavataram) ने यही दुर्लभ मुकाम हासिल कर लिया है। पिछले 24 घंटों में 92% की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज करने वाली यह फिल्म अब सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता की कहानी नहीं, बल्कि एक देशव्यापी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आंदोलन बन चुकी है।
🛕 सिनेमाघरों में मंदिरों जैसा उत्सव, गूंज रहे श्रीकृष्ण के भजन
देशभर के सिनेमाघरों में इन दिनों ऐसा माहौल देखने को मिल रहा है मानो मंदिरों में कोई भव्य उत्सव मनाया जा रहा हो। कहीं श्रीकृष्ण के भजन गूंज रहे हैं, तो कहीं दर्शक भावुक होकर प्रार्थना करते नजर आ रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर पीढ़ी इस फिल्म से गहरे भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव कर रही है।
🌍 विदेशी दर्शकों और अन्य भाषाओं में भी फिल्म का बज रहा डंका
सोशल मीडिया पर थिएटरों के भीतर के भक्तिमय वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जबकि विदेशों में भी फिल्म को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखाई दे रहा है। हिंदी के साथ-साथ तेलुगु और तमिल संस्करणों को मिली शानदार प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि ‘कृष्णावतारम’ भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से कहीं आगे निकल चुकी है। यह फिल्म अब केवल एक सिनेमाई अनुभव नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और भारतीय संस्कृति का जीवंत उत्सव बन गई है।
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