श्योपुर: मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क, जो अपनी चीता पुनर्स्थापना परियोजना के लिए विश्वभर में चर्चा में रहता है, एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला किसी चीते की मौत का नहीं, बल्कि चीतों की निगरानी के लिए तैनात विशेष रूप से प्रशिक्षित जर्मन शेफर्ड डॉग की मौत का है। शुक्रवार को वन विभाग ने इस घटना की पुष्टि की है, जिसने परियोजना के प्रबंधन पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
🐕 चीता परियोजना का था महत्वपूर्ण हिस्सा
यह डॉग कूनो की सुरक्षा और चीतों की ट्रैकिंग में एक महत्वपूर्ण संसाधन था। इसे वर्ष 2022 में हरियाणा के पंचकूला में विशेष प्रशिक्षण देने के बाद कूनो लाया गया था। परियोजना के तहत इस पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, जिसमें अकेले इसके प्रशिक्षण पर 2 लाख रुपये से अधिक की लागत आई थी। इसकी जिम्मेदारी जंगल में चीतों की हरकतों पर बारीक नजर रखना और वन विभाग को सचेत करना था।
🔍 मौत का कारण: हार्ट अटैक या वाहन दुर्घटना?
प्रशिक्षित डॉग की अचानक हुई मौत ने कूनो की सुरक्षा निगरानी व्यवस्था को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। मौत के कारणों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं:
प्रारंभिक अनुमान: वन विभाग के अधिकारी इसे ‘हार्ट अटैक’ का मामला मान रहे हैं।
अन्य चर्चाएं: कुछ सूत्रों का दावा है कि डॉग की मौत किसी वाहन की चपेट में आने से हुई है।
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ और डिप्टी डायरेक्टर आर. थिरुकुरल ने बताया कि बुधवार शाम डॉग की मृत्यु हुई थी। गुरुवार को उसका पोस्टमार्टम संपन्न हो गया है। अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगा। अब वन विभाग को उस रिपोर्ट का इंतजार है, जो तय करेगी कि यह एक प्राकृतिक मृत्यु थी या किसी बड़ी चूक का परिणाम।📋 पोस्टमार्टम रिपोर्ट का है इंतजार
यह खबर आपको कैसी लगी?


मध्यप्रदेश




























