यदि आपके घर में पाइप वाली गैस (PNG) के साथ-साथ एलपीजी (LPG) सिलेंडर भी है, तो सावधान हो जाएं। 1 जून से सरकार ने गैस कनेक्शन से संबंधित नियमों में व्यापक संशोधन किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य गैस की कालाबाजारी को रोकना और सिस्टम में पारदर्शिता लाना है। अब एक पते पर दो तरह के गैस कनेक्शन (PNG और LPG) रखना संभव नहीं होगा।
🚫 PNG कनेक्शन वाले घरों में LPG पर रोक
तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने अपने डेटाबेस को पूरी तरह से लिंक कर दिया है। नए नियमों के तहत, यदि किसी पते पर एक्टिव पीएनजी कनेक्शन मिलता है, तो वहां एलपीजी रिफिल की बुकिंग सिस्टम द्वारा स्वतः ही ब्लॉक कर दी जाएगी। जो परिवार पहले से दोनों का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। नियमों का पालन न करने पर कनेक्शन सस्पेंड या हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है।
📜 कनेक्शन सरेंडर करने पर मिलेगा ‘ट्रांसफर वाउचर’
जो ग्राहक अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करेंगे, उन्हें एजेंसियों की ओर से एक विशेष ‘ट्रांसफर वाउचर’ दिया जाएगा। इसका लाभ यह है कि यदि भविष्य में आप किसी ऐसे क्षेत्र में शिफ्ट होते हैं जहां पीएनजी की सुविधा नहीं है, तो आप इसी वाउचर के जरिए बिना किसी नए सिक्योरिटी डिपॉजिट के अपना एलपीजी कनेक्शन दोबारा शुरू करवा सकेंगे।
⏳ रिफिल बुकिंग के लिए तय हुई नई समय सीमा
गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए अब एक तय गैप रखना अनिवार्य है:
शहरी क्षेत्र: दो बुकिंग के बीच न्यूनतम 25 दिन का अंतर होना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्र: दो बुकिंग के बीच न्यूनतम 45 दिन का अंतर होना चाहिए। ध्यान रहे, सालाना 12 सब्सिडी वाले सिलेंडरों के कोटे में सरकार ने कोई कटौती नहीं की है।
इन सख्त नियमों के पीछे सरकार का मकसद घरेलू सब्सिडी वाले सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग रोकना है। ‘राष्ट्रीय पीएनजी ड्राइव 2.0’ के तहत सरकार पाइप वाली गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। यदि आप भी इस बदलाव के दायरे में आते हैं, तो अपनी गैस एजेंसी से संपर्क करें और अपना रिकॉर्ड अपडेट करवाएं ताकि भविष्य में किसी असुविधा से बचा जा सके।🛡️ कालाबाजारी रोकने का मास्टरप्लान
संपादकीय टिप्पणी: संसाधनों का सही उपयोग और पारदर्शिता के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है। क्या आप पाइप वाली गैस (PNG) सेवा से संतुष्ट हैं, या आपको एलपीजी सिलेंडर अधिक सुविधाजनक लगता है? अपने विचार नीचे साझा करें।
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