नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आया है। टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने अपनी मूल पार्टी से अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय करने का निर्णय लिया है। रविवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई अहम बैठक के बाद, बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें अपना आधिकारिक पत्र सौंप दिया है। बागी सांसदों का नेतृत्व कर रहीं काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि 20 सांसदों के साथ उनका यह कदम पार्टी के कुल संख्या बल का दो-तिहाई से अधिक है, जिससे उन पर ‘दल-बदल विरोधी कानून’ लागू नहीं होगा। सांसदों ने अपनी नई रणनीति के तहत एनडीए (NDA) के साथ मिलकर देश के विकास के लिए काम करने की मंशा जताई है। सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने जानकारी दी कि विलय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 20 जुलाई से शुरू होने वाले लोकसभा सत्र में उनका अलग ब्लॉक होगा और उन्हें संसद में बैठने के लिए अलग स्थान आवंटित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कौन सी पार्टी असली तृणमूल है, इसका फैसला अब अदालत में होगा और जो भी कोर्ट का निर्णय होगा, उसका पालन किया जाएगा। इधर, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने प्रतिनिधिमंडल के जरिए स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर बागी गुट को मान्यता न देने की अपील की है। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने इन सांसदों के कदम को ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि जो लोग एनडीए के खिलाफ लड़े, उनका अब उसी के साथ जाना वैचारिक रूप से गलत है। सूत्रों का मानना है कि यदि बागी सांसद केवल एक ‘अलग गुट’ बनाने की मांग करते, तो उन्हें कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ता। इसी कारण से उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में पूरी तरह विलय करने का रास्ता चुना है ताकि दलबदल कानून से बचा जा सके। अब सबकी नजरें आगामी संसद सत्र और कोर्ट की कार्रवाई पर टिकी हैं।
⚖️ दो-तिहाई बहुमत के साथ दल-बदल कानून से बचाव
🏛️ लोकसभा में अलग ‘ब्लॉक’ की तैयारी
🔄 अभिषेक बनर्जी का विरोध और टीएमसी की प्रतिक्रिया
🧐 कानूनी पेच और भविष्य की राह
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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आया है। टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने अपनी मूल पार्टी से अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय करने का निर्णय लिया है। रविवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई अहम बैठक के बाद, बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें अपना आधिकारिक पत्र सौंप दिया है।
⚖️ दो-तिहाई बहुमत के साथ दल-बदल कानून से बचाव
बागी सांसदों का नेतृत्व कर रहीं काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि 20 सांसदों के साथ उनका यह कदम पार्टी के कुल संख्या बल का दो-तिहाई से अधिक है, जिससे उन पर ‘दल-बदल विरोधी कानून’ लागू नहीं होगा। सांसदों ने अपनी नई रणनीति के तहत एनडीए (NDA) के साथ मिलकर देश के विकास के लिए काम करने की मंशा जताई है।
🏛️ लोकसभा में अलग ‘ब्लॉक’ की तैयारी
सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने जानकारी दी कि विलय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 20 जुलाई से शुरू होने वाले लोकसभा सत्र में उनका अलग ब्लॉक होगा और उन्हें संसद में बैठने के लिए अलग स्थान आवंटित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कौन सी पार्टी असली तृणमूल है, इसका फैसला अब अदालत में होगा और जो भी कोर्ट का निर्णय होगा, उसका पालन किया जाएगा।
🔄 अभिषेक बनर्जी का विरोध और टीएमसी की प्रतिक्रिया
इधर, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने प्रतिनिधिमंडल के जरिए स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर बागी गुट को मान्यता न देने की अपील की है। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने इन सांसदों के कदम को ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा बताया है। उन्होंने कहा कि जो लोग एनडीए के खिलाफ लड़े, उनका अब उसी के साथ जाना वैचारिक रूप से गलत है।
🧐 कानूनी पेच और भविष्य की राह
सूत्रों का मानना है कि यदि बागी सांसद केवल एक ‘अलग गुट’ बनाने की मांग करते, तो उन्हें कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ता। इसी कारण से उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में पूरी तरह विलय करने का रास्ता चुना है ताकि दलबदल कानून से बचा जा सके। अब सबकी नजरें आगामी संसद सत्र और कोर्ट की कार्रवाई पर टिकी हैं।


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