खंडवा। निमाड़ की ऐतिहासिक पहचान ‘कर्मवीर विद्यापीठ’ को बंद किए जाने की आशंकाओं ने पूरे जिले में जनभावनाओं को आंदोलित कर दिया है। पत्रकार संगठनों से लेकर सामाजिक संस्थाओं तक, हर वर्ग इस मुद्दे पर एकजुट होकर सामने आ रहा है। सभी का मानना है कि यह केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि खंडवा की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है, जिसे किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा। इस संवेदनशील मुद्दे पर पंधाना विधायक छाया मोरे की सक्रियता और स्वप्रेरित पहल ने पूरे आंदोलन को नई ऊर्जा दी है। बिना किसी राजनीतिक दबाव के, स्वयं आगे बढ़कर उन्होंने इस विषय को राज्य के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाया।
📜 ‘माखन दादा’ की ऐतिहासिक विरासत सहेजना नैतिक दायित्व
विधायक मोरे ने भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की और उन्हें विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उन्होंने स्पष्ट किया कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय का खंडवा परिसर (कर्मवीर विद्यापीठ), महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रख्यात पत्रकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कर्मभूमि से जुड़ी अमूल्य धरोहर है। विधायक मोरे ने मुख्यमंत्री के समक्ष जोरदार तरीके से यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस संस्थान को बंद करना न केवल निमाड़ के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय होगा, बल्कि यह ‘माखन दादा’ की ऐतिहासिक विरासत के प्रति भी उपेक्षा होगी। उन्होंने मांग की कि खंडवा परिसर को यथावत संचालित रखा जाए और यहां सर्वसुविधायुक्त स्थायी भवन निर्माण की दिशा में शीघ्र कदम उठाए जाएं।
🤝 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिया सकारात्मक आश्वासन
इस महत्वपूर्ण पहल का परिणाम भी सकारात्मक रूप में सामने आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विषय की गंभीरता को स्वीकार करते हुए विधायक मोरे को आश्वस्त किया कि इस मामले में संवेदनशीलता के साथ विचार कर उचित कार्रवाई की जाएगी, ताकि क्षेत्र के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके। जनभावनाओं को विधायक छाया मोरे के नेतृत्व से नई दिशा और मजबूती मिली है, जिसकी पत्रकार संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा व्यापक सराहना की जा रही है।
⚠️ धरोहर नहीं बची तो होगा उग्र जनआंदोलन, दी चेतावनी
सामाजिक संगठनों ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि इस संस्थान को बंद करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो व्यापक जनआंदोलन होगा। हालांकि, मुख्यमंत्री के सकारात्मक रुख के बाद अब लोगों में उम्मीद जगी है कि सरकार खंडवा की इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए ठोस निर्णय लेगी। कुल मिलाकर कर्मवीर विद्यापीठ अब केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि निमाड़ की पहचान और युवाओं के भविष्य की नींव बन चुका है। ऐसे में इसे बचाने की यह मुहिम अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसमें विधायक छाया मोरे की भूमिका एक निर्णायक कड़ी बनकर उभरी है।
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