खंडवा। परिवार में संवाद की कमी बच्चों को भटकाव की ओर ले जा सकती है, लेकिन समय पर संवेदनशील हस्तक्षेप और सही मार्गदर्शन उन्हें फिर से सही दिशा दे सकता है। ऐसा ही एक प्रेरक मामला खंडवा में सामने आया है, जहां उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की 16 वर्षीय नाबालिग बच्ची को न्यायपीठ बाल कल्याण समिति (CWC) खंडवा ने अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में काउंसलिंग के बाद सुरक्षित रूप से उसके परिजनों को सौंप दिया।
🏠 ज्यादा रोक-टोक के कारण उठाया था घर छोड़ने का कदम
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि बच्ची ने माता-पिता के साथ संवाद की कमी, हर कार्य में अत्यधिक रोक-टोक और आसपास के रहवासियों से मदद लेने जैसी परिस्थितियों के चलते घर छोड़ दिया था। मामले की जानकारी मिलते ही समिति ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची को संरक्षण में लिया और उसकी मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग कराई।
🗣️ CWC ने की काउंसलिंग, माता-पिता को दी अहम सलाह
काउंसलिंग के दौरान यह सामने आया कि बच्ची को परिवार के साथ अधिक समय, समझ और भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता है। अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में समिति ने न केवल बच्ची की भावनाओं को समझा, बल्कि माता-पिता को भी यह समझाया कि बच्चों के समुचित विकास के लिए संवाद, विश्वास और समय देना अत्यंत आवश्यक है। समिति ने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बच्ची के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करें, उसकी भावनाओं का सम्मान करें और घर का वातावरण सहयोगात्मक व सुरक्षित बनाएं।
🤝 संकल्प के साथ बच्ची परिजनों को की गई सुपुर्द
काउंसलिंग के बाद बच्ची को इस संकल्प के साथ परिजनों के सुपुर्द किया गया कि परिवार भविष्य में उसे पर्याप्त समय देगा और उसके साथ बेहतर संवाद बनाए रखेगा। बच्ची के पिता पेशे से ड्राइवर हैं, जबकि माता गृहिणी हैं। इस अवसर पर बाल कल्याण समिति के सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, स्वप्निल जैन एवं कविता पटेल उपस्थित रहे। यह घटना समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि बच्चों के साथ संवाद, संवेदनशीलता और विश्वास ही हर पारिवारिक समस्या का स्थायी समाधान है।
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