नई दिल्ली: केंद्र सरकार के लगभग 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों की नजरें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। नई वेतन व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों की बेसिक पे और भत्तों में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसका मुख्य आधार ‘फिटमेंट फैक्टर’ होगा। यह वही पैमाना है जो पे-मैट्रिक्स के तहत नई बेसिक सैलरी निर्धारित करता है।
🔢 फिटमेंट फैक्टर और मूल वेतन में बदलाव
यूनियनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को 2 से 5 गुना तक रखने की मांग की जा रही है। यदि पे-लेवल 4 के एक कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे 25,500 रुपये है, तो अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर सैलरी का गणित कुछ इस प्रकार हो सकता है:
2 गुना फिटमेंट फैक्टर: संशोधित मूल वेतन 51,000 रुपये प्रति माह।
2.5 गुना फिटमेंट फैक्टर: बेसिक पे बढ़कर 63,750 रुपये प्रति माह।
3 गुना फिटमेंट फैक्टर: यह आंकड़ा 76,500 रुपये प्रति माह तक पहुंच सकता है। (नोट: ये आंकड़े सांकेतिक हैं, अंतिम निर्णय सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।)
सैलरी स्ट्रक्चर में मकान किराया भत्ता (HRA) का विशेष महत्व है, क्योंकि इसकी गणना बेसिक पे के प्रतिशत के आधार पर होती है। जैसे-जैसे मूल वेतन बढ़ेगा, HRA का ग्राफ भी ऊपर जाएगा। केंद्रीय कर्मचारियों का HRA शहर की कैटेगरी (X, Y, Z) के आधार पर तय होता है।🏠 बेसिक पे बढ़ते ही बढ़ेगा HRA का ग्राफ
📊 शहर की कैटेगरी के हिसाब से HRA का नया अनुमान
उदाहरण के लिए, यदि पे-लेवल 4 के कर्मचारी का मूल वेतन फिटमेंट फैक्टर के बाद 51,000 रुपये हो जाता है, तो वर्तमान स्लैब (30%, 20%, 10%) के अनुसार भत्ते का गणित बदल जाएगा:
30% HRA (X कैटेगरी शहर): 15,300 रुपये प्रति माह।
20% HRA (Y कैटेगरी शहर): 10,200 रुपये प्रति माह।
10% HRA (Z कैटेगरी शहर): 5,100 रुपये प्रति माह।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर में मामूली सा बदलाव भी हर पे-लेवल पर सैलरी को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। बेसिक पे में बढ़ोतरी का सीधा असर HRA और अन्य भत्तों पर पड़ना तय है, जिससे केंद्रीय कर्मचारियों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।
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