स्कूल शिक्षा विभाग ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) से वर्ष 2017 से 2019 के बीच किए गए डी.एल.एड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) की डिग्री को प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति की पात्रता श्रेणी से बाहर कर दिया है। इस कड़े फैसले के बाद से प्रदेशभर के शिक्षक और अभ्यर्थी बेहद परेशान हैं। दस्तावेज सत्यापन के दौरान एनआईओएस की इन डिग्रियों को अमान्य किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों अभ्यर्थी और उनके परिजन गहरे संकट में आ गए हैं।
खंडवा में दस्तावेज सत्यापन के दौरान सामने आए मामले
प्रदेश में दस हजार से अधिक प्राथमिक शिक्षकों के नियुक्ति की लिस्ट जारी की जा चुकी है, जिसके तहत वर्तमान में दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) का कार्य तेजी से चल रहा है। खंडवा जिले में बीते दो दिनों से सत्यापन प्रक्रिया जारी है। अब तक लगभग 125 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की गई है, जिनमें से छह अभ्यर्थियों की डी.एल.एड डिग्री नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) की पाई गई है, जिन्हें फिलहाल अमान्य कर दिया गया है।
क्या है शासन की गाइडलाइन और रोक का कारण?
शासन की गाइडलाइन में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि एनआईओएस की यह 18-माह (18-Month) की डी.एल.एड डिग्री सामान्य ‘डिप्लोमा इन एजुकेशन’ के समकक्ष नहीं मानी जाएगी। सत्यापन का यह पूरा कार्य शासन की तय गाइडलाइन के अनुसार ही किया जा रहा है। जिन अभ्यर्थियों ने 2017 से 2019 के बीच एनआईओएस से यह कोर्स किया है, उनकी डिग्रियों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
अंतिम निर्णय अब शासन स्तर पर लिया जाएगा
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बलवंत पटेल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि एनआईओएस से डी.एल.एड करने वाले अभ्यर्थियों की डिग्री फिलहाल अमान्य की गई है। इस पूरे संवेदनशील मामले पर अब अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खंडवा में अब तक छह अभ्यर्थियों की डिग्री अमान्य की गई है और उनकी आगे की सुनवाई शासन स्तर पर ही होगी। संबंधित अभ्यर्थी इस संबंध में शासन स्तर पर अपना लिखित आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि: ऐसे समझें पूरा मामला
नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) द्वारा प्राथमिक शिक्षकों के लिए दो वर्षीय डी.एल.एड पाठ्यक्रम अनिवार्य किया गया है। वहीं, एनआईओएस का 18 महीने का डी.एल.एड पाठ्यक्रम विशेष तौर पर उस समय के सेवारत अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिए तैयार किया गया था। इसे सामान्य सीधी भर्ती में 24 महीने के नियमित डी.एल.एड के समकक्ष नहीं माना जा रहा है। इस मुद्दे पर देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों के फैसले भी अलग-अलग रहे हैं, जिसके कारण अभ्यर्थियों में लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। यह निर्णय प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों के भविष्य को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
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